ई कोठी के धान ऊ कोठी में! तेजस्वी युग का आगाज़, लालू युग ढलान पर कार्यकारी अध्यक्ष बने तेजस्वी तो जदयू ने खोले ‘22 कांडों’ के पिटारे

बी के झा

पटना, 25 जनवरी

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) में वह क्षण आ चुका है, जिसकी आहट लंबे समय से बिहार की राजनीति में सुनाई दे रही थी। तेजस्वी यादव अब सिर्फ लालू प्रसाद के उत्तराधिकारी नहीं, बल्कि औपचारिक रूप से पार्टी के सर्वोच्च संचालनकर्ता बन चुके हैं। पटना के एक होटल में आयोजित राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में उन्हें सर्वसम्मति से राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष घोषित कर दिया गया। इसके साथ ही यह साफ हो गया कि लालू युग का सूर्य अस्त हो रहा है और तेजस्वी युग की सुबह हो चुकी है।लेकिन इस सियासी ताजपोशी के साथ ही बिहार की राजनीति में तीखा शोर भी उठ खड़ा हुआ।

जदयू का तीखा तंज: ‘परिवारवाद की कुर्सी’इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम पर जनता दल (यूनाइटेड) ने बिना समय गंवाए हमला बोला। पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ता नीरज कुमार ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा—“राजद में दलित, मुस्लिम, ओबीसी, ईबीसी वर्ग से कई बड़े चेहरे मौजूद हैं, लेकिन सबको दरकिनार कर पिता की कुर्सी बेटे को सौंप दी गई। यह खुला परिवारवाद है। 22 कांडों के आरोपी को पार्टी की कमान सौंपना नैतिकता के खिलाफ है।

ई कोठी के धान ऊ कोठी में डाल दिया गया है।

”नीरज कुमार ने यहां तक कहा कि “घर की बेटी ने भी इस पर आपत्ति जताई है”, इशारा करते हुए कि परिवार के भीतर भी इस फैसले को लेकर असहजता रही है।राजद का जवाब: ‘भविष्य का नेतृत्व’राजद खेमे में माहौल बिल्कुल अलग रहा। बैठक में मौजूद नेताओं के मुताबिक, यह फैसला किसी दबाव या जल्दबाज़ी में नहीं, बल्कि राजनीतिक यथार्थ और संगठनात्मक जरूरत को देखते हुए लिया गया।

राजद नेता ने मीडिया से कहा—“तेजस्वी यादव ही अब राजद और बिहार के भविष्य हैं। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के तौर पर उन्होंने संघर्ष किया, मुद्दे उठाए और पार्टी को ज़िंदा रखा। अब संगठन की बारी थी।

”कैसे हुआ ऐलान?

पटना में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक प्रस्ताव भोला यादव ने रखा घोषणा प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने की लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, मीसा भारती समेत सभी बड़े नेता मौजूद कार्यकारिणी सदस्यों ने हाथ उठाकर समर्थन दिया लालू प्रसाद यादव ने स्वयं तेजस्वी यादव को “सर्टिफिकेट” सौंपते हुए पार्टी की बागडोर दी।

क्यों ज़रूरी था यह बदलाव?

राजद सूत्रों के अनुसार—लालू प्रसाद की उम्र 80 वर्ष से अधिक स्वास्थ्य लगातार कमजोर 2020 विधानसभा चुनाव में सत्ता से दूरी पार्टी को रोजमर्रा के संचालन के लिए सक्रिय नेतृत्व की जरूरत यही कारण है कि 1997 में पार्टी स्थापना के बाद पहली बार राजद ने कार्यकारी अध्यक्ष का पद सृजित किया।

राजनीतिक विश्लेषण: आरोप बनाम अवसर

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि—जदयू का हमला नैरेटिव युद्ध का हिस्सा है तेजस्वी पर पुराने मामलों का मुद्दा चुनावी हथियार बनेगा वहीं राजद तेजस्वी को “युवा, संघर्षशील और विकल्प” के रूप में पेश करेगा प्रो. आलोक वर्मा कहते हैं—“यह सिर्फ संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि पीढ़ी परिवर्तन है।

तेजस्वी अब जवाबदेह होंगे—सिर्फ सरकार से नहीं, पार्टी के भीतर भी।”लालू की मौजूदगी, लेकिन निर्णायक भूमिका में तेजस्वी हालांकि लालू प्रसाद यादव की सर्वोच्चता अभी भी निर्विवाद है, लेकिन अब वे मार्गदर्शक की भूमिका में होंगे। रोजमर्रा की राजनीति, गठबंधन की बातचीत और चुनावी रणनीति—सबकी कमान अब तेजस्वी यादव के हाथ में है।

निष्कर्ष:

उत्तराधिकार तय, परीक्षा बाकीतेजस्वी यादव का कार्यकारी अध्यक्ष बनना—राजद के लिए साफ उत्तराधिकारसमर्थकों के लिए नई उम्मीदविरोधियों के लिए नया निशानाअब असली सवाल यह है—

क्या तेजस्वी ‘लालू की विरासत’ से आगे बढ़कर अपनी राजनीतिक पहचान गढ़ पाएंगे,या विपक्ष के ‘22 कांडों’ का साया उनके हर कदम पर भारी पड़ेगा?बिहार की राजनीति में यह अध्याय खुल चुका है—

अब हर फैसला, हर चूक और हर सफलता तेजस्वी युग की कसौटी बनेगी।

NSK

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