जन सुराज में ‘महाभारत’! टिकट बंटवारे पर फूटा गुस्सा — कार्यकर्ताओं ने फूंका प्रशांत किशोर का पुतला, लगाया ‘टिकट बेचने’ का आरोप , वारिसनगर से उज्जवलपुर तक बवाल — पोस्टर फाड़े गए, कार्यालय में तोड़फोड़ और आगजनी; PK की ‘स्वच्छ राजनीति’ पर उठे सवाल

बी के झा

NSK

समस्तीपुर/पटना / नई दिल्ली, 14 अक्टूबर

बिहार की राजनीति में नई हवा लाने का दावा करने वाले प्रशांत किशोर (PK) की पार्टी जन सुराज अब खुद अंदरूनी तूफान की चपेट में है। पार्टी द्वारा उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी होते ही वारिसनगर और उज्जवलपुर विधानसभा क्षेत्रों में भारी बवाल मच गया। नाराज कार्यकर्ताओं ने कार्यालय में तोड़फोड़, पोस्टर फाड़ने, आगजनी और पुतला दहन कर जमकर प्रदर्शन किया।

“प्रशांत किशोर चोर है” के नारे, कार्यकर्ताओं ने फूंका पुतला

वारिसनगर विधानसभा में मंगलवार को उस वक्त माहौल बिगड़ गया, जब जन सुराज की दूसरी लिस्ट जारी होते ही दर्जनों कार्यकर्ता गुस्से में पार्टी कार्यालय पहुंच गए। उन्होंने प्रशांत किशोर के बैनर-पोस्टर फाड़ दिए, और “प्रशांत किशोर चोर है” के नारे लगाते हुए पुतला दहन किया।

नाराज कार्यकर्ताओं का आरोप था कि पार्टी ने “पैसे लेकर टिकट बांटे हैं”।

एक कार्यकर्ता ने गुस्से में कहा,प्रशांत किशोर की सरकार जिंदगी में कभी नहीं बन सकती। वह उगने से पहले ही डूब गए। अब वह कभी राजनीति में नहीं उग पाएंगे।”मौके पर मौजूद अन्य कार्यकर्ताओं ने भी यही आरोप दोहराया कि जिन लोगों को टिकट मिला है, उनमें से ज्यादातर ने “पार्टी को चंदा या पैसा दिया” है।

उज्जवलपुर में भी बवाल, पोस्टर जले — कार्यकर्ताओं का फूटा गुस्साइसी तरह उज्जवलपुर विधानसभा क्षेत्र में भी टिकट बंटवारे से नाराज कार्यकर्ताओं ने जमकर हंगामा किया। यहां भी जन सुराज के पोस्टर फाड़े गए, बैनर जलाए गए और प्रशांत किशोर के खिलाफ नारेबाजी हुई।

कई कार्यकर्ताओं ने कहा कि जन सुराज अब “जन” की नहीं, “धन” की पार्टी बन चुकी है।अब तक 116 प्रत्याशियों की लिस्ट जारी — पहली लिस्ट पर भी उठे थे सवाल जन सुराज पार्टी ने अब तक 116 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया है।

पहली सूची 9 अक्टूबर को जारी की गई थी, जिसमें 51 प्रत्याशी शामिल थे।उस वक्त भी कई जिलों में असंतोष की खबरें आई थीं और प्रशांत किशोर पर “पैसे लेकर टिकट देने” के आरोप लगे थे।अब दूसरी सूची के बाद जो कुछ वारिसनगर और उज्जवलपुर में हुआ, उसने एक बार फिर PK की “साफ-सुथरी राजनीति” की छवि पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मीडिया से दूरी बनाए दिखे PK,

कार्यकर्ता बोले — “जन सुराज की पोल खुल गई”बवाल के बाद जब पत्रकारों ने प्रशांत किशोर से प्रतिक्रिया चाही तो वह मीडिया से दूरी बनाए रखे दिखे।इस पर नाराज कार्यकर्ताओं ने कहा जो व्यक्ति बिहार में राजनीति की नई शुरुआत की बात करता था, वह आज सवालों से भाग रहा है। उसकी पार्टी में भी वही भ्रष्टाचार और टिकट की खरीद-फरोख्त है, जो बाकी पार्टियों में होता है।”

विपक्षी दलों का तंज — “PK की कलई खुल गई”जन सुराज के भीतर हुए इस हंगामे पर विपक्षी दलों ने त्वरित प्रतिक्रिया दी।

आरजेडी सुप्रीमो तेजस्वी यादव ने कहा,बिहार के मतदाताओं के सामने प्रशांत किशोर का चेहरा अब साफ़ हो गया है। जो खुद को राजनीतिक सुधारक बताते थे, अब उन्हीं पर पैसा लेकर टिकट बेचने का आरोप लग रहा है।”

वहीं, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रेम चंद मिश्रा ने कहा —जब सभी राजनीतिक दलों ने PK के लिए दरवाजे बंद कर दिए, तब उन्होंने अपने लिए ‘पार्टी की दुकान’ खोल ली। लेकिन बिहार की जनता बहुत समझदार है, और अब उनके असली चरित्र को पहचान चुकी है।”

विश्लेषक बोले — “चुनाव टिकट अब ईमानदारों की पहुंच से दूर”राजनीतिक विश्लेषकों ने भी इस विवाद पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।

एक वरिष्ठ विश्लेषक ने कहा —चाहे बड़ी पार्टी हो या छोटी, आज टिकट वितरण का मौसम ही ‘धन उगाही’ का मौसम बन गया है। ऐसे माहौल में योग्य और ईमानदार व्यक्ति का चुनाव में उतरना लगभग नामुमकिन हो गया है।”उन्होंने आगे जोड़ा कि जन सुराज जैसी नई पार्टियों से जनता को उम्मीद थी कि वे नई राजनीति का मॉडल पेश करेंगी, लेकिन PK की पार्टी भी उन्हीं पुराने रास्तों पर चलती दिखाई दे रही है।

राजनीतिक धरातल पर ‘जन सुराज’ की परीक्षा शुरू प्रशांत किशोर ने बिहार की राजनीति में “जन से जन तक” यात्रा के ज़रिए अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश की थी।

उन्होंने बार-बार कहा था कि उनकी पार्टी “स्वस्थ, पारदर्शी और जन-आधारित राजनीति” की मिसाल बनेगी।लेकिन टिकट बंटवारे को लेकर उठ रहे सवालों और कार्यकर्ताओं के विद्रोह ने उनकी उस छवि को गंभीर झटका दिया है।

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि PK इस संकट को कैसे संभालते हैं —क्या वे खुद सामने आकर सफाई देंगे,या यह आग धीरे-धीरे जन सुराज की नींव को हिला देगी?

निष्कर्ष:

राजनीति बदलने निकले प्रशांत किशोर, खुद बन गए पुराने सिस्टम का हिस्सा बिहार में यह पहला मौका नहीं है जब किसी पार्टी में टिकट बंटवारे को लेकर हंगामा हुआ हो।लेकिन जन सुराज, जिसने खुद को “राजनीति बदलने वाली ताकत” के रूप में पेश किया था, उसके भीतर से उठे ऐसे आरोपों ने जनता को सोचने पर मजबूर कर दिया है।एक स्थानीय कार्यकर्ता के शब्दों में —पहले लोग कहते थे राजनीति गंदी है, अब लगता है गंदगी ही राजनीति बन चुकी है।

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