बी के झा
NSK

कानपुर ( यूपी ) / न ई दिल्ली, 3 फरवरी
देश की औद्योगिक पहचान रही कानपुर की धरती अब भारत की सैन्य शक्ति के नए युग की गवाह बन चुकी है। स्माल आर्म्स फैक्ट्री (SAF) कानपुर में तैयार की जा रही अत्याधुनिक असॉल्ट राइफल AK-203 अब पूरी तरह स्वदेशी हो चुकी है। रूस के सहयोग से शुरू हुई यह परियोजना आज ‘आत्मनिर्भर भारत’ की सबसे ठोस और घातक उपलब्धियों में शामिल हो गई है।
एक मिनट में 600 राउंड फायरिंग की क्षमता रखने वाली यह राइफल न सिर्फ तकनीक में उन्नत है, बल्कि युद्ध के हर मौसम और हर परिस्थिति में भारतीय सैनिक की भरोसेमंद साथी बनने जा रही है।—
रूस से साझेदारी, भारत की आत्मनिर्भर उड़ान
AK-203 का निर्माण भारत-रूस के संयुक्त उपक्रम IRRPL (इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड) के तहत शुरू हुआ था। शुरुआत में यह राइफल रूस और भारत के साझा पुर्जों से बन रही थी, लेकिन जुलाई 2024 से SAF कानपुर में इसके निर्माण के साथ स्वदेशीकरण की रफ्तार तेज हुई।पहले चरण में जहां 85 प्रतिशत पुर्जे रूस से आते थे, वहीं भारत की हिस्सेदारी महज 15 प्रतिशत थी। इसके बाद यह अनुपात बदलता गया—
70:30, फिर 30:70—और अब AK-203 100 प्रतिशत भारतीय पुर्जों और तकनीक से तैयार की जा रही है।कानपुर की SAF में इसके अधिकांश पार्ट्स बनते हैं, कोलकाता की राइफल फैक्ट्री ईशापुर कुछ तकनीकी हिस्से तैयार करती है और अमेठी की ऑर्डिनेंस फैक्ट्री कोरवा में इसकी असेंबलिंग होती है।—
तीन मौसम, तीन कड़ी परीक्षा
एंसेना को सौंपे जाने से पहले AK-203 को तीन चरणों में कठोर ट्रायल से गुजरना होगा। पहला विंटर ट्रायल फरवरी में हिमाचल प्रदेश के सुमडो में होगा, जहां बर्फीले तापमान में इसकी विश्वसनीयता परखी जाएगी।इसके बाद तपती गर्मी में राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में और अंत में दक्षिण भारत की भारी बारिश में इसका परीक्षण किया जाएगा। इन सभी ट्रायल में सेना, SAF और अमेठी की असेंबलिंग यूनिट की संयुक्त टीम मौजूद रहेगी।—
INSAS की विदाई, AK-203 की तैनाती
अब तक भारतीय सैनिकों का मुख्य हथियार INSAS राइफल रही है, लेकिन आने वाले वर्षों में इसकी जगह AK-203 ले लेगी। पहले चरण में पांच लाख से अधिक AK-203 राइफलें भारतीय सेना को देने की योजना है, जिनमें से कई राइफलें पहले ही सैनिकों तक पहुंच चुकी हैं।अगले सात वर्षों में सेना के हर जवान को इस आधुनिक असॉल्ट राइफल से लैस करने का लक्ष्य तय किया गया है। खास बात यह है कि अब जो राइफलें सेना को मिलेंगी, वे पूरी तरह स्वदेशी होंगी।—
AK-47 से कहीं आगे
AK-203AK-203 को AK-47 का आधुनिक और घातक संस्करण माना जा रहा है। जहां AK-47 दशकों तक युद्ध का पर्याय रही, वहीं AK-203 आधुनिक युद्ध की जरूरतों के मुताबिक तैयार की गई है।AK-203 की खासियतें फोल्डिंग और एडजस्टेबल बटस्टॉकनाटो ग्रेड 7.62 मिमी कारतूस का इस्तेमाल30 राउंड की मैगजीन, एक मिनट में 600 राउंड फायरिंग क्षमता400 मीटर तक शत-प्रतिशत प्रभावी और सटीक फायरपिकेटिनी रेल, नाइट विजन और आधुनिक ऑप्टिक्स से लैस वजन लगभग 3.8 किलोग्राम स्टॉक मोड़ने पर लंबाई 690 मिमी—
आत्मनिर्भर भारत की बंदूक
SAF कानपुर के महाप्रबंधक सुरेंद्रपति के अनुसार, “AK-203 का पूर्ण स्वदेशीकरण ‘आत्मनिर्भर भारत’ मिशन की बड़ी सफलता है। अब भारत न केवल आधुनिक असॉल्ट राइफल बना रहा है, बल्कि वैश्विक स्तर पर हथियार निर्माण में आत्मविश्वास के साथ खड़ा है।”उनके मुताबिक, सभी मौसमों में सफल ट्रायल के बाद यह राइफल बड़े पैमाने पर सेना को सौंपी जाएगी।—
बदलती जंग, मजबूत भारतAK-203 सिर्फ एक हथियार नहीं, बल्कि भारत की रणनीतिक सोच, औद्योगिक क्षमता और सैन्य आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। कानपुर की फैक्ट्री से निकली यह ‘किलर मशीन’ अब सीमाओं पर तैनात होकर दुश्मन को साफ संदेश देगी—
भारत अब हथियार खरीदने वाला नहीं, हथियार गढ़ने वाला राष्ट्र है।
