दरभंगा कांड और गृहमंत्रालय की जिम्मेदारी: सम्राट चौधरी के नेतृत्व पर उठते सवाल

बी के झा

दरभंगा/पटना / न ई दिल्ली, 10‌ फरवरी

दरभंगा में छह वर्षीया बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या के बाद जिस तरह शहर सुलगा, उसने न केवल स्थानीय पुलिस प्रशासन बल्कि राज्य के गृहमंत्रालय की कार्यशैली को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है। इस जघन्य अपराध के बाद उपजे जनाक्रोश, उपद्रव और पुलिस कार्रवाई के बीच अब सीधे तौर पर उपमुख्यमंत्री सह गृहमंत्री सम्राट चौधरी की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं।यह सवाल केवल विपक्ष तक सीमित नहीं हैं, बल्कि शिक्षाविदों, सामाजिक बुद्धिजीवियों और स्थानीय नागरिक समाज से भी उठ रहे हैं।

शिक्षाविद का तीखा आरोप: ‘राजनीतिक संरक्षण में अपराध फल-फूल रहे’

दरभंगा के एक वरिष्ठ शिक्षाविद ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बेहद गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा:“आज दरभंगा ही नहीं, पूरा बिहार राजनीतिक रूप से संरक्षित अपराधियों की गिरफ्त में है। कानून व्यवस्था की कमान सीधे गृहमंत्रालय के हाथ में होती है, और वर्तमान में इसकी जिम्मेदारी सम्राट चौधरी पर है।”शिक्षाविद का आरोप है किअपराधियों में कानून का डर खत्म हो चुका है,पुलिस तंत्र पर राजनीतिक दबाव है,और गृहमंत्रालय नियंत्रण के बजाय मूकदर्शक बना हुआ है।उनके अनुसार:“जब गृहमंत्री खुद राजनीतिक महत्वाकांक्षा में उलझे हों, तो पुलिस व्यवस्था का संतुलन बिगड़ना स्वाभाविक है।

”जातीय उन्माद और सत्ता की राजनीति का आरोप

उसी शिक्षाविद ने आगे कहा कि राज्य में जिस तरहअपराध के बाद सामाजिक विभाजन गहराता है,जातीय आधार पर बयानबाज़ी होती है,और प्रशासनिक कार्रवाई को राजनीतिक चश्मे से देखा जाता है,उससे यह आशंका पैदा होती है कि“कहीं न कहीं सत्ता के भीतर कुछ लोग अराजकता को राजनीतिक अवसर में बदलने की कोशिश कर रहे हैं।”उन्होंने आरोप लगाया:“सम्राट चौधरी अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा के लिए प्रदेश में जातीय उन्माद को हवा दे रहे हैं। यह बेहद खतरनाक खेल है, जो बिहार को सामाजिक विस्फोट की ओर ले जा सकता है।”

विपक्ष का सीधा हमला: ‘गृहमंत्रालय पूरी तरह फेल’

कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने दरभंगा कांड को लेकर सम्राट चौधरी पर सीधा हमला बोला है।कांग्रेस नेताओं का कहना है:राज्य में गृहमंत्री बदल गए, लेकिन सिस्टम नहीं बदला,अपराध की घटनाओं के बाद सिर्फ प्रतिक्रिया होती है, रोकथाम नहीं,और हर बड़े अपराध के बाद सरकार भीड़ और उपद्रव को ही मुख्य मुद्दा बना देती है।एक विपक्षी नेता ने कहा:“जब गृहमंत्री ही जवाबदेही से बचते दिखें, तो पुलिस किसके प्रति जवाबदेह होगी?”

छात्र संगठनों की मांग: एसएसपी नहीं, नीति पर सवाल

मिथिला स्टूडेंट यूनियन द्वारा एसएसपी की बर्खास्तगी की मांग के साथ-साथ यह सवाल भी उठाया गया किक्या सिर्फ अधिकारियों को हटाने से व्यवस्था सुधरेगी?या फिर गृहमंत्रालय को अपनी नीति और प्राथमिकताओं की समीक्षा करनी होगी?

छात्र नेताओं ने कहा:“जब तक गृहमंत्री खुद जवाब नहीं देंगे, तब तक सिर्फ ट्रांसफर–पोस्टिंग से कुछ नहीं बदलेगा।”

कानूनविदों का दृष्टिकोण: ‘जवाबदेही ऊपर तक तय होनी चाहिए’

वरिष्ठ कानूनविदों का कहना है कि कानून व्यवस्था की संवैधानिक जिम्मेदारी राज्य सरकार और गृहमंत्री की होती है,किसी एक थाना या एसएसपी को बलि का बकरा बनाना प्रशासनिक नैतिकता नहीं है।एक संवैधानिक विशेषज्ञ ने कहा:“अगर अपराध बार-बार हो रहे हैं, तो इसका मतलब है कि नीति स्तर पर विफलता है। और नीति का चेहरा गृहमंत्री होता है।”

स्थानीय पत्रकारों की टिप्पणी: ‘सत्ता सवालों से बच रही’

स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि सरकार अपराध से ज्यादा उपद्रव की खबरों को हाईलाइट कर रही है,ताकि असली मुद्दा — बच्ची के साथ हुआ अपराध — पीछे छूट जाए।एक वरिष्ठ पत्रकार के अनुसार:“जब भी सवाल गृहमंत्री तक पहुंचता है, जवाब गोल हो जाता है।”

निष्कर्ष:

सम्राट चौधरी के सामने सबसे बड़ी परीक्षा

दरभंगा की घटना ने सम्राट चौधरी के सामने एक स्पष्ट सवाल रख दिया है:

क्या वे केवल राजनीतिक नेता हैं या एक संवेदनशील गृहमंत्री भी?

क्या वे अपराध रोकने की नीति देंगे या सिर्फ घटनाओं के बाद कार्रवाई?

और क्या वे आलोचनाओं को साजिश कहकर टालेंगे या आत्ममंथन करेंगे?आज सवाल एसएसपी का नहीं,थाने का नहीं,भीड़ का नहीं—सवाल है गृहमंत्रालय की आत्मा का।

NSK

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