बी के झा
NSK

मुजफ्फरपुर / पटना, 11 फरवरी
मुजफ्फरपुर में मंगलवार का दिन प्रशासन के लिए चेतावनी बनकर सामने आया। एक ओर अतिक्रमण हटाओ अभियान में कथित भेदभाव ने सड़कों पर आग जला दी, तो दूसरी ओर स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर जनता की बढ़ती शिकायतों ने सरकारी नीतियों पर सवाल खड़े कर दिए। दोनों ही घटनाएं अलग-अलग प्रतीत होती हैं, लेकिन इनके केंद्र में एक ही सवाल है—
क्या शासन-प्रशासन आम आदमी के लिए और रसूखदारों के लिए अलग-अलग नियम अपनाता है?
सिकंदरपुर में बुलडोजर रुका, भरोसा टूटा सिकंदरपुर थाना क्षेत्र के लकड़ी ढाई बांध रोड पर मंगलवार दोपहर लगभग एक बजे नगर निगम की अतिक्रमण हटाओ टीम पहुंची। शुरुआत में अभियान सामान्य रहा, लेकिन जैसे ही एक राजनीतिक-सामाजिक रूप से प्रभावशाली व्यक्ति के मकान को छोड़कर बुलडोजर आगे बढ़ाया गया, माहौल बदल गया।जिन गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के मकान चंद मिनटों में जमींदोज कर दिए गए थे, उन्होंने इसे “कानून नहीं, रसूख का राज” करार दिया। देखते ही देखते लोग सड़क पर उतर आए, टायर जलाए गए, आगजनी हुई और यातायात पूरी तरह ठप हो गया।
स्थिति तब और बिगड़ गई जब उसी रसूखदार व्यक्ति द्वारा एक स्थानीय युवक की कथित पिटाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इसके बाद इलाके में अफरातफरी मच गई और प्रशासन को अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा।
प्रशासन की सफाई, लेकिन सवाल बरकरार
वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप और वार्ता के बाद विवादित मकान पर भी बुलडोजर चलाया गया। सिकंदरपुर थानाध्यक्ष ने बताया कि “स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया है और कानून सभी पर समान रूप से लागू किया गया।”हालांकि स्थानीय लोग इससे संतुष्ट नहीं दिखे। उनका कहना था कि अगर विरोध न होता, तो क्या उस मकान पर कार्रवाई होती?
कानूनविदों की राय: ‘चयनात्मक कार्रवाई संविधान के खिलाफ’
वरिष्ठ अधिवक्ता अनिरुद्ध शंकर कहते हैं—“अतिक्रमण हटाने का अधिकार प्रशासन को है, लेकिन चयनात्मक कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है। कानून सबके लिए समान होना चाहिए, चाहे वह झोपड़ी हो या पक्का मकान।”
पूर्व जिला जज आर.के. सिन्हा के अनुसार—“
बुलडोजर न्याय की सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि इसमें सुनवाई और पारदर्शिता का अभाव रहता है। जब कार्रवाई में पक्षपात दिखे, तो जनाक्रोश स्वाभाविक है।”
राजनीतिक विश्लेषक: ‘यह सिर्फ अतिक्रमण नहीं, सत्ता का चरित्र है’राजनीतिक विश्लेषक डॉ. अरुण मिश्रा मानते हैं—“यह घटना केवल नगर निगम की नहीं है। यह उस राजनीतिक संस्कृति को उजागर करती है, जहां प्रशासन पहले देखता है कि सामने कौन है। आम आदमी के लिए नियम सख्त और प्रभावशाली के लिए लचीले।”उनके अनुसार, ऐसे मामलों से सरकार की सुशासन की छवि को गहरा आघात लगता है।
विपक्ष का हमला: ‘गरीबों पर बुलडोजर, रसूखदारों को राहत’
घटना को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार पर तीखा हमला बोला।राजद प्रवक्ता ने कहा—“सरकार की नीति साफ है—गरीबों के घर तोड़ो, नेताओं और ठेकेदारों के घर छोड़ दो। अगर जनता विरोध न करे तो अन्याय चलता रहेगा।”कांग्रेस नेता ने इसे “संवैधानिक मूल्यों के साथ खिलवाड़” बताया, जबकि वाम दलों ने इसे जनविरोधी शासन मॉडल करार दिया।
दूसरी तस्वीर:
स्मार्ट मीटर और जनता की बढ़ती शिकायतें
इसी बीच मुजफ्फरपुर सर्किल के 77 सेक्शन की 308 पंचायतों से स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर सर्वाधिक शिकायतें सामने आई हैं। ऊर्जा मंत्रालय के निर्देश पर 9 से 23 फरवरी तक चल रहे स्मार्ट मीटर पखवाड़े में यह खुलासा हुआ।अधीक्षण अभियंता पंकज राजेश ने स्वीकार किया कि—“मीटर रीडिंग, रिचार्ज, तकनीकी खराबी और बिलिंग को लेकर उपभोक्ताओं में असंतोष है। अब घर-घर जाकर फीडबैक लिया जाएगा।”
शिक्षाविदों की चेतावनी: ‘तकनीक भरोसे के बिना बोझ बन जाती है’
बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के प्रोफेसर डॉ. संजय कुमार कहते हैं—“स्मार्ट मीटर तकनीकी रूप से लाभकारी हो सकते हैं, लेकिन जब उपभोक्ता को पारदर्शिता और समाधान न मिले, तो वही तकनीक विरोध का कारण बन जाती है।”उनका मानना है कि सरकार को पहले भरोसा, फिर तकनीक का सिद्धांत अपनाना होगा।
जनता का सवाल: भरोसा कैसे बने?
चाहे सिकंदरपुर का बुलडोजर विवाद हो या स्मार्ट मीटर की शिकायतें—दोनों मामलों में जनता की पीड़ा एक जैसी है। लोग पूछ रहे हैं—
क्या कानून सच में सबके लिए समान है?
क्या नीतियां जमीन पर आम आदमी के हित में लागू हो रही हैं?
और क्या प्रशासन बिना दबाव के निष्पक्ष फैसले लेने में सक्षम है?
निष्कर्ष:
आग सड़कों पर नहीं, सिस्टम में है
मुजफ्फरपुर की ये घटनाएं बताती हैं कि जनाक्रोश अचानक नहीं फूटता, वह लंबे समय से जमा असंतोष का परिणाम होता है। जब प्रशासनिक कार्रवाई में पारदर्शिता और समानता नहीं दिखती, तो सड़कों पर उतरना लोगों की मजबूरी बन जाती है।अब यह सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह केवल बुलडोजर और योजनाओं से नहीं, बल्कि न्याय, संवाद और भरोसे से शासन चलाए—
वरना ऐसे दृश्य बार-बार दोहराए जाते रहेंगे।
