बिहार चुनाव 2025: जीतनराम मांझी ने जारी की उम्मीदवारों की पहली सूची, 6 सीटों पर उतारे अपने सिपाही — बोले, “कम सीटें मिलीं पर मनोबल ऊँचा है”

NSK

पटना / नई दिल्ली, 14 अक्टूबर

रबिहार विधानसभा चुनाव 2025 का बिगुल बज चुका है और अब राजनीतिक दल एक-एक कर अपने उम्मीदवारों की लिस्ट जारी करने में जुट गए हैं। इसी क्रम में हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने मंगलवार को अपनी पार्टी के 6 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी।यह सीटें राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के तहत HAM(S) के हिस्से में आई हैं। मांझी ने इस सूची के साथ यह भी स्पष्ट कर दिया कि भले सीटें कम मिली हों, लेकिन पार्टी NDA के साथ मजबूती से खड़ी है।HAM(S) के 6 उम्मीदवारों की सूची — जानिए किसे कहां से मिला टिकटनिर्वाचन क्षेत्र आरक्षित वर्ग उम्मीदवार का नामइमामगंज (अ.जा.) दीपा कुमारीटिकारी सामान्य अनिल कुमारबाराचट्टी (अ.जा.) ज्योति देवीअतरी सामान्य रोमित कुमारसिकंदरा (अ.जा.) प्रफुल्ल कुमार मांझीकुटुम्बा (अ.जा.) ललन रामइन छह सीटों पर HAM ने जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश की है। खास बात यह है कि इनमें तीन सीटें अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित हैं, जो मांझी की दलित राजनीति के मूल आधार को मजबूत करती हैं।

NDA सीट शेयरिंग का फॉर्मूला — सबको मिला तय हिस्साNDA में सीट बंटवारे का फॉर्मूला पहले ही तय किया जा चुका है।बिहार की कुल 243 विधानसभा सीटों में से —जेडीयू और भाजपा — 101-101 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी,लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) — 29 सीटों पर,हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (उपेंद्र कुशवाहा) — 6-6 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी।

यह फार्मूला NDA के भीतर सीटों के पुराने समीकरणों के अनुसार तय किया गया है, हालांकि HAM(S) के नेताओं के बीच इस पर हल्की नाराजगी भी देखी जा रही है।“कम सीटें मिलीं, पर NDA से वफादारी नहीं टूटी” — मांझी कम सीटें मिलने के सवाल पर जीतनराम मांझी ने बेबाकी से कहा —“माना कि हमें कम सीटें मिली हैं। हमारे कार्यकर्ताओं का मनोबल कमजोर हुआ है, असंतोष भी व्याप्त है, लेकिन इसकी क्षतिपूर्ति भविष्य में होगी। मैं कार्यकर्ताओं को आश्वासन देता हूं कि बिहार के हित के लिए हम NDA के साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं।

उन्होंने आगे कहा —हम बिहार को फिर से जंगलराज की ओर नहीं जाने देंगे। बिहार के अवाम की नींद और चैन की रक्षा हमारा कर्तव्य है।

NDA जीतेगा, बिहार का सम्मान बना रहेगा — जय मोदी, तय नीतीश।इस बयान को राजनीतिक हलकों में “मांझी की नाराजगी और निष्ठा के बीच संतुलन” के रूप में देखा जा रहा है।पार्टी में रणनीति: सीमित सीटों पर पूरा दमHAM(S) के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, मांझी की रणनीति यह है कि सीमित सीटों पर ही पूरे दम-खम के साथ मुकाबला किया जाए।इमामगंज और सिकंदरा जैसी सीटों को “सेफ ज़ोन” माना जा रहा है, जहां पार्टी ने मजबूत उम्मीदवार उतारे हैं।पार्टी की नजर दलित वोटरों और गरीब तबकों पर है, जिन्हें मांझी “बिहारियत की असली ताकत” बताते हैं।

राजनीतिक विश्लेषण: मांझी की भूमिका ‘किंगमेकर’ से ‘संयोजक’ की ओरराजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भले HAM(S) की सीट संख्या सीमित हो, लेकिन जीतनराम मांझी की राजनीतिक उपयोगिता NDA में बनी रहेगी।उनकी पार्टी भले 6 सीटों पर लड़े, पर उनका प्रभाव कई इलाकों में निर्णायक माना जाता है, खासकर मगध और दक्षिण बिहार में।विशेषज्ञ मानते हैं कि मांझी NDA के भीतर दलित चेहरे के रूप में अपनी भूमिका को और मजबूत करना चाहते हैं।

निष्कर्ष:

मांझी का संदेश — सीमित संख्या में, पर निर्णायक भूमिका मेंकम सीटों से शुरुआत के बावजूद जीतनराम मांझी ने साफ कर दिया है कि उनकी पार्टी न तो पीछे हटने वाली है, न ही गठबंधन छोड़ने वाली।

उनका संदेश स्पष्ट है — “कम सीटों में भी बड़ा असर दिखाया जा सकता है।”अब देखना यह है कि NDA के इस छोटे लेकिन मुखर घटक की ताकत चुनावी मैदान में कितनी कारगर साबित होती है।

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