बी के झा
NSK

पटना / नई दिल्ली, 15 अक्टूबर
बिहार विधानसभा चुनाव की सरगर्मी अब चरम पर है। चुनावी रणभूमि में जहां महागठबंधन की रणनीति अब खुलकर सामने आने लगी है, वहीं प्रशांत किशोर के जन सुराज की ओर से भी एक बड़ा फैसला सामने आया है। इस बीच आज बिहार की राजनीति में सबकी निगाहें एक ही नाम पर टिकी हैं — तेजस्वी यादव।पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव आज वैशाली जिले की राघोपुर विधानसभा सीट से नामांकन दाखिल करने जा रहे हैं। सुबह 11 बजे वह पर्चा भरेंगे और इसके बाद एक विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे।
RJD की पारंपरिक सीट है राघोपुरराघोपुर सीट लालू परिवार की राजनीतिक विरासत मानी जाती है। लालू प्रसाद यादव ने इसी सीट से अपना राजनीतिक सफर शुरू किया था, उसके बाद राबड़ी देवी भी यहीं से विधायक रहीं।2010 में एक बार जेडीयू के सतीश कुमार ने यह सीट आरजेडी से छीन ली थी, लेकिन 2015 में तेजस्वी यादव ने राघोपुर से जीतकर दोबारा इसे पार्टी के कब्जे में लिया।2020 में तेजस्वी यादव ने सतीश कुमार को 38,174 वोटों के भारी अंतर से हराया था, जबकि 2015 में यह अंतर 22,733 वोटों का था। अब 2025 के इस चुनाव में वह तीसरी बार इसी सीट से नामांकन भरने जा रहे हैं।
इस बार किससे है मुकाबला?इस बार राघोपुर का चुनावी मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।जहां आरजेडी से तेजस्वी यादव मैदान में हैं, वहीं प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने राघोपुर से चंचल सिंह को उम्मीदवार बनाया है।बीजेपी की ओर से उम्मीदवार का आधिकारिक ऐलान अभी नहीं हुआ है, लेकिन पार्टी के अंदर तेजस्वी को घेरने की रणनीति पर गहन मंथन जारी है।
प्रशांत किशोर ने राघोपुर से नहीं लड़ा चुनावराजनीतिक गलियारों में कयास लगाए जा रहे थे कि प्रशांत किशोर खुद राघोपुर से तेजस्वी यादव के खिलाफ मैदान में उतरेंगे।लेकिन सोमवार को जन सुराज की दूसरी सूची जारी होते ही इन अटकलों पर विराम लग गया। पार्टी ने राघोपुर से चंचल सिंह को प्रत्याशी बनाकर साफ कर दिया कि प्रशांत किशोर खुद चुनाव नहीं लड़ेंगे।यह निर्णय ऐसे समय आया है जब महागठबंधन और एनडीए, दोनों ही खेमों में प्रत्याशियों की सूची को लेकर हलचल तेज है।
आरोपों के बीच घिर गए प्रशांत किशोरजैसे ही जन सुराज ने राघोपुर से चंचल सिंह को उम्मीदवार बनाया, राजनीतिक हलकों में चर्चा का दौर तेज हो गया।
जेडीयू प्रवक्ता अनुप्रिया ने प्रशांत किशोर पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि –प्रशांत किशोर का राघोपुर से चुनाव न लड़ना और एक कमजोर उम्मीदवार को टिकट देना इस बात का प्रमाण है कि अंदरखाने किसी प्रकार की आर्थिक डील हुई है। उन्होंने बिहारियों से कहा था कि वे राजनीति बदलने आए हैं, लेकिन उनका असली मकसद तो धन उगाही निकला।”वहीं कई राजनीतिक विश्लेषकों ने भी सवाल उठाए हैं कि जो प्रशांत किशोर बार-बार तेजस्वी यादव की आलोचना करते थे और उन्हें चुनौती देने की बात करते थे, वे अचानक मैदान से बाहर क्यों हो गए?
महागठबंधन में सीट शेयरिंग पर सहमतिइधर दिल्ली में महागठबंधन की बैठकों में भी हलचल तेज है।सूत्रों के अनुसार, RJD को 134, कांग्रेस को 60, और वामपंथी दलों को 31 सीटें मिलने पर सहमति बन चुकी है।इनमें से CPI ML को 21 सीटें, जबकि CPI और CPM को 10 सीटें दी जा सकती हैं।मुकेश सहनी की वीआईपी पार्टी को 15 सीटें मिल सकती हैं।हालांकि 2-3 सीटों को लेकर बातचीत अभी जारी है।महागठबंधन के सूत्रों का कहना है कि आज सीट शेयरिंग का औपचारिक ऐलान भी हो सकता है।
नामांकन से पहले बड़ा शो ऑफ पावर तेजस्वी यादव के नामांकन के साथ ही आरजेडी आज अपनी चुनावी ताकत का प्रदर्शन करने जा रही है।राघोपुर में एक विशाल जनसभा आयोजित की गई है, जिसमें लालू प्रसाद यादव के करीबी नेता, आरजेडी विधायक और हजारों समर्थक शामिल होंगे।राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि तेजस्वी आज अपने नामांकन के साथ महागठबंधन के चुनावी अभियान की औपचारिक शुरुआत करने जा रहे हैं।
बिहार की राजनीति में बढ़ी हलचल बिहार के राजनीतिक गलियारों में आज का दिन बेहद अहम है।एक ओर तेजस्वी यादव अपनी तीसरी पारी की शुरुआत करने जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशांत किशोर के फैसले ने नया राजनीतिक भूचाल ला दिया है।
एनडीए नेताओं ने भी पीके पर तीखा हमला बोला है और कहा है कि –जो व्यक्ति बिहार की राजनीति को नया रास्ता दिखाने की बात कर रहा था, वही आज अपने सिद्धांतों से पीछे हट गया।”राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, राघोपुर सीट अब सिर्फ एक विधानसभा क्षेत्र नहीं, बल्कि बिहार की सियासत का “पल्स सेंटर” बन चुकी है, जहां हर दल की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है।
निष्कर्ष:
राघोपुर के मैदान में अब सीधा मुकाबला तेजस्वी यादव बनाम जन सुराज के चंचल सिंह के बीच तय हो चुका है।बीजेपी के उम्मीदवार की घोषणा बाकी है, लेकिन माहौल पहले से गर्म है।तेजस्वी जहां अपनी पारंपरिक सीट पर तीसरी बार जीत की हैट्रिक लगाने की कोशिश में हैं, वहीं प्रशांत किशोर की पार्टी अपने पहले चुनावी सफर में यह साबित करना चाहेगी कि वह सिर्फ रणनीति नहीं, बल्कि जनता की उम्मीदों की राजनीति करती है।
