बिहार चुनाव 2025: BJP-JDU की लिस्ट के बाद अब सबकी नजर चिराग पासवान पर — किन सीटों पर होगी ‘फ्रेंडली फाइट’?

बी के झा

NSK

पटना / नई दिल्ली, 15 अक्टूबर 2025

विधानसभा चुनाव 2025 का रण पूरी तरह सज चुका है। बीजेपी और जेडीयू के उम्मीदवारों की पहली सूची जारी होते ही अब सबकी निगाहें एनडीए के तीसरे सबसे चर्चित चेहरे — चिराग पासवान — पर टिक गई हैं।

लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने आज अपनी पहली और दूसरी उम्मीदवार सूची जारी करने का ऐलान किया है।पहली लिस्ट दोपहर 2 बजे और दूसरी शाम 5 बजे जारी की जाएगी। कुल 29 सीटों पर चिराग की पार्टी चुनाव लड़ेगी।LJP (रामविलास) की पहली लिस्ट तैयार, आज दो चरणों में होगी घोषणा

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, एलजेपी (रामविलास) ने 29 में से 27 सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नाम लगभग तय कर दिए हैं, जबकि दो सीटों पर फाइनल मंथन जारी है।चिराग पासवान ने कहा है कि कुछ सीटों पर सिंबल बांट दिए गए हैं, बाकी उम्मीदवारों के नाम पर अंतिम निर्णय आज शाम तक हो जाएगा।

”इन दिग्गजों को मिला सिंबल एलजेपी (रामविलास) के जिन नेताओं को पार्टी ने सिंबल दिया है, उनमें कई पुराने और नए चेहरे शामिल हैं।सूत्रों के मुताबिक:गोविंदगंज सीट से पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राजू तिवारी गोरखा (सुरक्षित) सीट से सीमांत मृणाल (चिराग के भांजे और धनंजय पासवान के बेटे) बखरी (सुरक्षित) से संजय पासवान ब्रह्मपुर सीट से हुलास पांडे मैदान में उतरेंगे।

गौरतलब है कि सीमांत मृणाल को कुछ महीने पहले ही नीतीश सरकार ने राज्य एससी आयोग का चेयरमैन नियुक्त किया था।जेडीयू और एलजेपी में ‘फ्रेंडली फाइट’ के आसार दिलचस्प यह है कि एलजेपी को जो 29 सीटें मिली हैं, उनमें से कई सीटें ऐसी हैं जो जेडीयू या एनडीए के अन्य सहयोगी दलों की सिटिंग सीटें हैं। इसी वजह से उन सीटों पर अभी नामों की घोषणा रोक दी गई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है किइन सीटों पर ‘फ्रेंडली फाइट’ यानी दोस्ताना मुकाबला देखने को मिल सकता है।”हालांकि, चिराग पासवान का कहना है कि एनडीए में कोई मतभेद नहीं है, सीटों का बंटवारा तय है। हम नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार में फिर से एनडीए सरकार बनाने जा रहे हैं।

”युवा चेहरों पर फोकस, पर देरी के पीछे क्या राजनीति?एलजेपी (रामविलास) का दावा है कि उसकी लिस्ट में युवा और नए उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी गई है।

लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठ रहा है कि बीजेपी और जेडीयू के बाद चिराग पासवान ने इतनी देर क्यों की?

सूत्रों के मुताबिक, चिराग अपने कुछ “रणनीतिक उम्मीदवारों” को लेकर बीजेपी नेतृत्व से हरी झंडी चाहते थे।राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि चिराग पासवान इस बार कोई गलती नहीं दोहराना चाहते। पिछले चुनाव में उनकी ‘एकला चलो’ नीति ने उन्हें नुकसान पहुंचाया था। इसलिए वह हर कदम सोच-समझकर उठा रहे हैं।

”क्या नीतीश से दूरी, बीजेपी से नजदीकी?

हालांकि चिराग ने खुले मंच से यह कहा कि नीतीश कुमार एनडीए के नेता हैं, लेकिन राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि चिराग पासवान और बीजेपी हाईकमान के बीच बढ़ती नजदीकी कहीं नीतीश के लिए चुनौती न बन जाए।

एक वरिष्ठ पत्रकार ने नाम न छापने की शर्त पर कहा—भले ही एनडीए एकजुट दिख रहा है, पर चिराग को बीजेपी की ‘अगली पीढ़ी का चेहरा’ माना जा रहा है। बीजेपी उन्हें बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार के बाद का विकल्प बनाकर उभारना चाहती है।”

मोदी के ‘हनुमान’ पर सवाल:

देरी से क्या संकेत दे रहे चिराग?

राजनीतिक गलियारों में आज सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रधानमंत्री मोदी के स्वयं घोषित ‘हनुमान’ चिराग पासवान आखिर टिकटों की घोषणा में इतनी देर क्यों कर रहे हैं?

”क्या यह संकेत है कि वह अभी भी स्थिति को परख रहे हैं?

क्या उन्हें आशंका है कि नीतीश कुमार किसी समय एनडीए का समीकरण बदल सकते हैं?राजनीतिक पंडितों का कहना है कि अगर ऐसा हुआ, तो चिराग की राजनीतिक उड़ान फिर से अधूरी रह सकती है, जैसे उनके पिता स्वर्गीय रामविलास पासवान की कई बार रह गई थी।”

बीजेपी का दांव और नीतीश की चिंता भाजपा के शीर्ष नेतृत्व द्वारा चिराग पासवान को दी जा रही बढ़ती अहमियत ने नीतीश कुमार की चिंता जरूर बढ़ा दी है।भाजपा ने इस बार चुनावी प्रचार में चिराग को प्रमुख स्थान दिया है, जिससे यह संदेश गया है कि नीतीश के बिना भी भाजपा बिहार की राजनीति में दमखम दिखाना चाहती है।

”राजनीतिक विश्लेषक डॉ. रमेश त्रिपाठी कहते हैं—बीजेपी इस चुनाव में दोहरी रणनीति पर काम कर रही है — नीतीश को चेहरा रखकर, चिराग को भविष्य बनाकर।

निष्कर्ष:

29 सीटें, कई संकेत और एक बड़ी राजनीतिक परीक्षा एलजेपी (रामविलास) की दोनों सूचियों का आज का ऐलान बिहार के चुनावी परिदृश्य में एक नया मोड़ लाने वाला साबित हो सकता है।

जहां बीजेपी और जेडीयू अपने पुराने गठबंधन की तस्वीर दिखा रहे हैं, वहीं चिराग पासवान अपनी पार्टी को एनडीए की नई धुरी के रूप में पेश करने की कोशिश में हैं।अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या चिराग की राजनीतिक रणनीति उन्हें नीतीश से आगे खड़ा करेगी, या 2020 की तरह फिर आसमान ही देखते रह जाएंगे।

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