बी के झा
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नई दिल्ली/”तेहरान/वॉशिंगटन, 5 अप्रैल
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने अब खुली टकराव की शक्ल ले ली है। Donald Trump के ‘48 घंटे’ के अल्टीमेटम पर ईरान ने जिस तीखे अंदाज़ में पलटवार किया है, उसने दुनिया को एक नए संकट के मुहाने पर ला खड़ा किया है। तेहरान ने न सिर्फ इस चेतावनी को खारिज किया, बल्कि साफ शब्दों में कहा—“यह कदम अमेरिका के लिए नरक के दरवाजे खोल देगा।”
टकराव का उफान: धमकी बनाम जवाब
रानी की सेंट्रल मिलिट्री कमांड के शीर्ष अधिकारी, जनरल अली अब्दुल्लाही अलीबादी ने ट्रंप के बयान को “बेबस, घबराहट भरा और असंतुलित” करार दिया। उनका कहना था कि इस तरह की भाषा एक वैश्विक शक्ति के लिए नहीं, बल्कि हताशा में लिए गए फैसले की निशानी है।ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘Truth Social’ पर ईरान को चेतावनी देते हुए कहा था कि यदि 48 घंटे के भीतर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरान के अहम बुनियादी ढांचे को निशाना बनाएगा।
होर्मुज का संकट: दुनिया की सांस अटकी
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, जहां से दुनिया के एक बड़े हिस्से का तेल और गैस गुजरता है, इस संघर्ष का केंद्र बन चुका है। ईरान की ओर से इस मार्ग को बंद करने की आशंका ने वैश्विक बाजारों और ऊर्जा सुरक्षा को हिला कर रख दिया है।
बुशहर पर हमला और परमाणु चेतावनी
तनाव उस वक्त और बढ़ गया जब अमेरिका और इजरायल ने बुशहर परमाणु केंद्र पर लगातार हमले किए। इसके बाद ईरान ने पहली बार परमाणु प्रभावों को लेकर सीधी चेतावनी दी।ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि यदि इस हमले के कारण रेडियोएक्टिव फॉलआउट हुआ, तो उसका असर ईरान से ज्यादा खाड़ी देशों—सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, बहरीन, कतर और ओमान—पर पड़ेगा, जहां “जीवन ठहर सकता है।
कूटनीतिक मोर्चे पर भी सख्ती
इसी बीच, ट्रंप प्रशासन ने ईरान से जुड़े लोगों पर कार्रवाई तेज करते हुए कई नागरिकों के ग्रीन कार्ड और वीजा रद्द कर दिए हैं। इनमें दिवंगत ईरानी जनरल कासिम सुलेमानी के परिवार से जुड़े लोग भी शामिल हैं, जिन्हें हिरासत में लेकर निर्वासन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
विश्व के लिए खतरे की घंटी
मौजूदा हालात सिर्फ अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं हैं। यह टकराव वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही कूटनीतिक रास्ता नहीं निकाला गया, तो यह संघर्ष एक बड़े युद्ध का रूप ले सकता है, जिसके परिणाम पूरी दुनिया को भुगतने पड़ सकते हैं।
फिलहाल, सवाल यही है—
क्या यह सिर्फ बयानबाजी है, या दुनिया एक नए युद्ध के दरवाजे पर खड़ी है?
