Bihar Election 2025 Live: महागठबंधन को झटका: JMM के अलग होने से बढ़ी मुश्किलें, बिहार चुनाव में सियासी तापमान चरम पर

बी के झा

NSK

पटना/नई दिल्ली, 19 अक्टूबर

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 अपने सबसे नाटकीय मोड़ पर पहुंच चुका है। नामांकन, रणनीति और गठबंधनों की राजनीति के बीच अब हालात यह संकेत दे रहे हैं कि यह चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन का नहीं, बल्कि राजनीतिक नैतिकता की कसौटी का भी बन चुका है।

राज्य में दो चरणों में मतदान होना है — पहला चरण 6 नवंबर और दूसरा 11 नवंबर को। पहले चरण की 121 सीटों के लिए नामांकन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि दूसरे चरण के लिए 20 अक्टूबर तक पर्चा दाखिल किए जा रहे हैं। नाम वापसी की अंतिम तिथि भी 20 अक्टूबर तय की गई है, जिसके बाद चुनाव मैदान में उतरने वाले उम्मीदवारों की अंतिम सूची सामने आएगी।

JMM ने दिया झटका, महागठबंधन में बढ़ी दरार

राजनीतिक समीकरणों के बीच सबसे बड़ा झटका महागठबंधन (INDIA ब्लॉक) को लगा है।झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने ऐलान किया है कि वह बिहार की 6 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगा।यह फैसला उस समय आया है जब आरजेडी और कांग्रेस पहले से ही सीट बंटवारे और प्रत्याशी चयन को लेकर अंदरूनी तनाव झेल रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला महागठबंधन के लिए “ताबूत की अंतिम कील” साबित हो सकता है।

अब चुनावी तस्वीर ऐसी बनती जा रही है जहां मुकाबला केवल एनडीए बनाम महागठबंधन का नहीं, बल्कि एनडीए बनाम जनसुराज (PK) और जनतांत्रिक गठबंधन जैसे त्रिकोणीय या बहुकोणीय टकराव का रूप ले सकता है।

NDA में भी सब कुछ ठीक नहीं, सम्राट चौधरी पर सवाल जहां एक ओर विपक्ष की एकता पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं सत्तारूढ़ एनडीए के भीतर भी सब कुछ सामान्य नहीं दिखता।भले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार चुनावी रैलियों में जीत का दावा कर रहे हों, लेकिन अंदरूनी कलह और उम्मीदवार चयन पर नाराजगी साफ झलक रही है।

उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को लेकर भी अब सवाल उठने लगे हैं।

1995 में हुए 7 लोगों के नरसंहार के एक मामले में उनका नाम सामने आ चुका है, और उन्हें इस मामले में जेल भी जाना पड़ा था।जानकारों के अनुसार, उस वक्त दो बार उनका बेल आवेदन सीजीएम कोर्ट ने खारिज कर दिया था, लेकिन बाद में जुवनाइल कोर्ट से उन्हें रिहा किया गया।मामला यह है कि उस समय सम्राट चौधरी ने अदालत के सामने अपनी उम्र गलत बताई थी, जबकि बाद में 2019 में उन्होंने अपनी उम्र 51 वर्ष बताई।

अब सवाल यह उठता है —

क्या उस वक्त की उम्र सही थी या 2019 वाली?

क्या बिहार की जनता को अपने भविष्य के लिए ऐसे नेता को स्वीकार करना चाहिए जिन पर नरसंहार जैसे गंभीर आरोप हैं?

विशेषज्ञों का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी, जो हमेशा “भ्रष्टाचार और अपराध-मुक्त राजनीति” की बात करते हैं, अब ऐसे उम्मीदवारों के लिए वोट मांगने जाएंगे — यह भाजपा की “नैतिक परीक्षा” होगी।‘

सत्ता की भूख’ ने बिगाड़ा हर गठबंधन का चरित्र

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बिहार का यह चुनाव केवल विकास, रोजगार या जातीय समीकरण का नहीं, बल्कि राजनीतिक चरित्र और विश्वसनीयता का भी इम्तिहान है।

एक वरिष्ठ राजनीतिक विशेषज्ञ ने कहा —यदि आरजेडी शाहबुद्दीन के बेटे को उम्मीदवार बनाकर सवालों के घेरे में खड़ी है, तो भाजपा भी उससे बड़ी गलती कर रही है, जो 7 लोगों के नरसंहार में आरोपी नेता को अपना चेहरा बना रही है। ऐसे में दोनों गठबंधनों में जनता का भरोसा डगमगा रहा है।”

उन्होंने आगे कहा —बिहार के मतदाता अब भावनाओं से नहीं, अपने भविष्य को देखकर वोट करेंगे। जनता यह समझ चुकी है कि किसी दल को बिहार की भलाई से अब खास सरोकार नहीं है — सबको सत्ता चाहिए, चाहे उम्मीदवार खूनी ही क्यों न हो।

”बदलाव की चाहत और असमंजस का दौर

राज्य में इस समय चुनावी माहौल गर्म है। हर गली-मोहल्ले में चर्चा है कि नीतीश कुमार की थकी हुई छवि, भाजपा की आपसी प्रतिस्पर्धा, और महागठबंधन की टूट — इन सबके बीच जनता का रुख किस ओर झुकेगा, यह कहना मुश्किल है।

लेकिन एक बात साफ है —बिहार अब बदलाव चाहता है, और यह बदलाव किसी गठबंधन के नारे से नहीं, बल्कि जनता के विवेक से तय होगा।

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