बी के झा
NSK


पटना/तारापुर / नई दिल्ली, 21 अक्टूबर
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का रंग अब गहराता जा रहा है। खासकर तारापुर विधानसभा सीट पर सियासी पारा चरम पर है। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी इस बार यहीं से किस्मत आजमा रहे हैं, और इस सीट पर अब एक नया राजनीतिक मोड़ देखने को मिल रहा है।मुकेश सहनी की पार्टी विकास शील इंसान पार्टी (VIP) के नेता सकलदेव बिंद ने बीजेपी का दामन थाम लिया है।
सम्राट चौधरी ने खुद उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई।सकलदेव बिंद ने आरोप लगाया कि मुकेश सहनी ने उनका टिकट “बेच” दिया और उन्हें चुनावी मैदान से बाहर कर दिया। नाराज़गी के बाद उन्होंने वीआईपी छोड़कर भाजपा ज्वाइन कर ली।
मुकेश सहनी ने मेरा टिकट पैसे लेकर दूसरे को दे दिया। मैं ऐसे व्यक्ति के साथ अब नहीं रह सकता,” — सकलदेव बिंद ने भाजपा में शामिल होते समय कहा।
VIP को बड़ा झटका, NDA में बढ़त का दावा
सकलदेव बिंद कभी वीआईपी के कद्दावर नेताओं में गिने जाते थे और तारापुर से टिकट की उम्मीद लगाए बैठे थे। लेकिन टिकट कटते ही उन्होंने पाला बदल लिया।
उनकी इस ‘घर वापसी’ से विपक्षी गठबंधन को झटका माना जा रहा है, जबकि भाजपा खेमे में इसे बड़ी मजबूती के रूप में देखा जा रहा है।बीजेपी का दावा है कि बिंद के आने से सम्राट चौधरी की जीत अब लगभग तय मानी जा रही है ।
राजद और जनसुराज ने बढ़ाई टेंशन
तारापुर सीट पर राजद पहले ही अपना उम्मीदवार उतार चुकी है। वहीं जनसुराज अभियान के प्रमुख प्रशांत किशोर (PK) ने भी अपने प्रत्याशी के साथ पूरे दमखम से मैदान संभाल रखा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि “जनसुराज” की सक्रियता ने सम्राट चौधरी की राह आसान नहीं रहने दी है।स्थानीय लोगों का मानना है कि इस बार मुकाबला दिलचस्प और टक्कर का रहेगा।
प्रशांत किशोर समर्थकों ने सकलदेव बिंद पर तंज कसते हुए कहा —अगर सकलदेव बिंद इतने प्रभावशाली होते तो वे टिकट कटने के बाद इस तरह भागते नहीं।
पैसे और दबाव की राजनीति
तारापुर की असली समस्या है।”‘नरसंहार की छाया’ और जनता की शंकाएं
कुछ वरिष्ठ नागरिकों और स्थानीय बुद्धिजीवियों का मानना है कि सम्राट चौधरी की राजनीतिक छवि पर अब भी 1995 के तारापुर नरसंहार की छाया मौजूद है।
एक वरिष्ठ शिक्षाविद ने नाम न बताने की शर्त पर कहा —अगर इस बार मतदान निष्पक्ष और शांतिपूर्ण हुआ, तो सम्राट चौधरी के लिए जीत की राह आसान नहीं होगी।”
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि सम्राट चौधरी के समर्थक खुलेआम डराने-धमकाने की राजनीति में लगे हैं, लेकिन प्रशासन मौन है।चुनाव आयोग से निष्पक्ष मतदान की उम्मीद जताई जा रही है, पर जनता के बीच अब भी डर और असमंजस का माहौल बना हुआ है।
निष्कर्ष:
हर दिन बदलता समीकरण
तारापुर की यह सीट अब सिर्फ एक विधानसभा क्षेत्र नहीं, बल्कि बिहार की सियासी धड़कन बन गई है।एक ओर सम्राट चौधरी की सत्ता और संघ का प्रभाव है, तो दूसरी ओर प्रशांत किशोर का जनसंपर्क और स्थानीय असंतोष।सकलदेव बिंद का भाजपा में जाना निश्चित रूप से चुनावी संतुलन को प्रभावित करेगा — लेकिन अंतिम फैसला जनता के मतपेटी से ही निकलेगा।
