बी के झा
NSK


सीतामढ़ी ( बिहार ) नई दिल्ली, 22 अक्टूबर
बिहार विधानसभा चुनाव के टिकट बंटवारे को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) में मचा घमासान अब खुलकर सामने आ गया है। पार्टी की चर्चित महिला नेता और पूर्व मुखिया रितु जायसवाल ने अपनी ही पार्टी के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया है।
सोमवार को उन्होंने सीतामढ़ी जिले की परिहार विधानसभा सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल किया। इस दौरान मंच पर कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए वह भावुक हो उठीं और फूट-फूटकर रोने लगीं।
नामांकन के बाद भावुक रितु बोलीं — “मैं साजिश की शिकार हुई हूं”रितु जायसवाल ने नामांकन के बाद सभा में कहा कि उन्हें राजनीतिक साजिश के तहत पार्टी से टिकट से वंचित किया गया। उन्होंने अपने संबोधन में लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव दोनों से झोली फैलाकर समर्थन मांगा। भावुक होते हुए उन्होंने कहा,मैंने परिहार की जनता के लिए दिन-रात काम किया है। मुझे इस सीट से दूर करना मेरे आत्मा की आवाज के खिलाफ है। लेकिन मुझे यकीन है कि परिहार की जनता सच्चाई के साथ खड़ी होगी।”
रितु ने यह भी दावा किया कि आरजेडी की आधिकारिक उम्मीदवार इस सीट से जीत नहीं पाएंगी।क्यों नाराज हुईं रितु जायसवाल?
रितु जायसवाल ने 2020 के विधानसभा चुनाव में परिहार सीट से आरजेडी के टिकट पर चुनाव लड़ा था और बेहद कम अंतर — केवल 1549 वोटों से हार गई थीं। उनके मजबूत जनाधार को देखते हुए माना जा रहा था कि उन्हें दोबारा टिकट मिलेगा।लेकिन, इस बार पार्टी ने परिहार सीट से डॉ. रामचंद्र पूर्वे की बहू स्मिता पूर्वे को उम्मीदवार बनाया।
पार्टी ने रितु को बेलसंड सीट से चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिया था, मगर उन्होंने साफ मना करते हुए कहा कि वह परिहार से ही चुनाव लड़ेंगी, क्योंकि यही उनका “जनसेवा का कर्मक्षेत्र” है।
टिकट कटने के बाद उन्होंने 19 अक्टूबर को X (ट्विटर) पर लिखा —परिहार को छोड़कर किसी अन्य क्षेत्र से चुनाव लड़ना मेरी आत्मा को स्वीकार नहीं। यह फैसला आसान नहीं, लेकिन यह मेरे मन की आवाज और परिहार की जनता की भावना है।”कौन हैं रितु जायसवाल?
1 मार्च 1977 को वैशाली जिले के हाजीपुर में जन्मीं रितु जायसवाल बिहार की उन महिला नेताओं में गिनी जाती हैं जिन्होंने ग्राम पंचायत स्तर से राजनीति की शुरुआत कर राज्य की राजनीति में अपनी पहचान बनाई।वह पूर्व IAS अधिकारी अरुण कुमार की पत्नी हैं। अरुण कुमार ने स्वेच्छा से सेवा निवृत्ति (VRS) लेकर समाज सेवा का रास्ता चुना और शिक्षा एवं ग्रामीण विकास के क्षेत्र में काम करने लगे। आज भी वे बिहार के छात्रों को मुफ्त कोचिंग देकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मदद करते हैं।
मुखिया दीदी” से बनीं जनता की आवाजरितु जायसवाल को लोग “मुखिया दीदी” के नाम से जानते हैं। वह सिंहवाहिनी पंचायत की मुखिया रह चुकी हैं और अपने कार्यकाल में उन्होंने पंचायत को मॉडल ग्राम पंचायत में तब्दील कर दिया।उनकी पहल पर गांव में सड़क, जल निकासी, स्वच्छता, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और स्वावलंबन जैसे कई अभियानों को गति मिली। ग्रामीणों की भागीदारी से पंचायत को विकसित करने के उनके मॉडल की सराहना राष्ट्रीय स्तर पर भी हुई।दो चुनावों में मिली हार, पर जनता के बीच बढ़ा प्रभाव2020 के विधानसभा चुनाव में वह परिहार से आरजेडी प्रत्याशी रहीं और मामूली अंतर से हार गईं। इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने शिवहर सीट से आरजेडी उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा, जहां उन्हें जेडीयू उम्मीदवार लवली आनंद से हार का सामना करना पड़ा।हालांकि, इन दोनों चुनावों में उनकी मजबूत उपस्थिति और जमीनी पकड़ ने उन्हें स्थानीय राजनीति में एक प्रभावशाली चेहरा बना दिया।
RJD का पलटवार:
बीजेपी के इशारे पर बगावत ”रितु जायसवाल की बगावत पर RJD के राष्ट्रीय प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कड़ा हमला बोला।
उन्होंने कहा —किस उम्मीदवार को कहां से चुनाव लड़ाना है, यह पार्टी नेतृत्व का फैसला होता है। लेकिन रितु जायसवाल बीजेपी और अमित शाह के प्रभाव में आकर निर्दलीय प्रत्याशी बनी हैं ताकि महागठबंधन को नुकसान पहुंचाया जा सके। बिहार की जनता इन चालों को समझ चुकी है।”
वहीं, कुछ स्थानीय समाजसेवियों ने भी रितु के आंसुओं को “चुनावी भावुकता” करार देते हुए कहा कि अगर पार्टी ने उन्हें किसी और क्षेत्र से लड़ने का मौका दिया था, तो उन्हें पार्टी के फैसले का सम्मान करना चाहिए था।
अब परिहार में मुकाबला दिलचस्प
रितु जायसवाल के निर्दलीय मैदान में उतरने से परिहार विधानसभा सीट पर मुकाबला अब बेहद दिलचस्प हो गया है। एक ओर आरजेडी की अधिकृत उम्मीदवार स्मिता पूर्वे हैं, वहीं दूसरी ओर “मुखिया दीदी” के नाम से लोकप्रिय रितु जायसवाल जनता के बीच अपनी सादगी और जनसेवा की छवि के साथ मैदान में हैं।
अब देखना यह होगा कि जनता इस बार भावनाओं को तरजीह देती है या पार्टी निष्ठा को।
