बी के झा
कैमूर (बिहार):/ नई दिल्ली, 23 अक्टूबर
बिहार विधानसभा चुनाव के बीच कैमूर जिले की मोहनिया सीट पर सियासत ने नया मोड़ ले लिया है। विपक्षी गठबंधन (महागठबंधन) के भीतर सीट बंटवारे और प्रत्याशी चयन को लेकर जारी खींचतान के बीच राष्ट्रीय जनता दल (RJD) को बड़ा झटका तब लगा जब उसके प्रत्याशी श्वेता सुमन का नामांकन पत्र रद्द कर दिया गया। लेकिन तेजस्वी यादव ने तुरंत ही ऐसा राजनीतिक दांव चला दिया जिससे पूरी तस्वीर बदल गई।
नामांकन खारिज, वजह क्या रही?
मोहनिया सीट अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है। नियम के मुताबिक उम्मीदवार को बिहार राज्य की नोटिफाइड एससी जाति से होना जरूरी है।
आरजेडी प्रत्याशी श्वेता सुमन ने अपने नामांकन पत्र में बताया था कि उनका मायका उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में है और वे अनुसूचित जाति की हैं।हालांकि, बीजेपी ने इस पर आपत्ति जताते हुए चुनाव आयोग से शिकायत की कि “जो व्यक्ति उत्तर प्रदेश में एससी श्रेणी का है, उसे बिहार में तब तक आरक्षित श्रेणी का लाभ नहीं मिल सकता जब तक वह बिहार की नोटिफाइड एससी सूची में शामिल न हो।”जांच के बाद निर्वाचन आयोग ने बीजेपी की आपत्ति को सही पाया और श्वेता सुमन का नामांकन खारिज कर दिया।
श्वेता सुमन का दर्द — “बीजेपी के इशारे पर अन्याय”नामांकन रद्द होने की खबर मिलते ही श्वेता सुमन भावुक हो उठीं। उन्होंने कहा,“मेरे साथ अन्याय हुआ है। यह सब बीजेपी के इशारे पर किया गया है। मैं इस फैसले को कोर्ट में चुनौती दूंगी।”उनकी आंखों में आंसू थे, लेकिन हिम्मत कायम थी। उन्होंने कहा कि जनता सब देख रही है और सच्चाई जल्द सामने आएगी।
तेजस्वी यादव का ‘मास्टरस्ट्रोक’आरजेडी की मुश्किल बढ़ते ही पार्टी ने तुरंत डैमेज कंट्रोल की रणनीति अपनाई।तेजस्वी यादव ने देर शाम घोषणा की कि आरजेडी अब निर्दलीय प्रत्याशी रवि पासवान को समर्थन देगी।
रवि पासवान कोई साधारण उम्मीदवार नहीं — वे वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद छेदी पासवान के बेटे हैं, जिनकी कैमूर जिले में गहरी पकड़ मानी जाती है।
तेजस्वी का यह कदम राजनीतिक हलकों में ‘मास्टरस्ट्रोक’ कहा जा रहा है।
एक स्थानीय विश्लेषक ने कहा —तेजस्वी ने एक तीर से दो निशाने साधे हैं। पहला, उन्होंने भाजपा को बैकफुट पर ला दिया और दूसरा, पासवान समाज के बीच अपना प्रभाव और गहरा कर लिया।”
“जनता देख रही है” —
स्थानीय समाजसेवी मोहनिया के एक वरिष्ठ समाजसेवी ने कहा, रवि पासवान ना केवल छेदी पासवान के बेटे हैं बल्कि जमीन से जुड़े हुए युवा नेता हैं। तेजस्वी का यह कदम महागठबंधन के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है।
कैमूर और आसपास के क्षेत्रों में इसका सीधा असर पड़ेगा।”
चुनावी समीकरणों पर असर
मोहनिया सीट अब निर्दलीय बनाम एनडीए की जंग में तब्दील हो चुकी है।बीजेपी को जहां राहत मिली थी कि आरजेडी का उम्मीदवार बाहर हो गया, वहीं तेजस्वी यादव ने फौरन समर्थन देकर सियासी समीकरण पलट दिए।
स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर रवि पासवान को आरजेडी का संगठनात्मक समर्थन मिल गया तो एनडीए के लिए यह सीट कड़ी टक्कर वाली बन जाएगी।
निष्कर्ष:
मोहनिया की राजनीति में नामांकन रद्द होने की घटना ने माहौल को पूरी तरह बदल दिया है।तेजस्वी यादव का निर्णय न केवल फुर्ती और रणनीतिक कौशल का उदाहरण है बल्कि यह संदेश भी देता है कि आरजेडी हर परिस्थिति में मुकाबला करने को तैयार है।
अब देखना होगा कि मतदाता इस “तेजस्वी चाल” को कितना स्वीकार करते हैं — लेकिन इतना तय है कि मोहनिया की लड़ाई अब और ज्यादा दिलचस्प हो गई है।
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