बी के झा
NSK


समस्तीपुर / नई दिल्ली, 24 अक्टूबर
बिहार विधानसभा चुनाव के लिए एनडीए के प्रचार अभियान का बिगुल शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समस्तीपुर जिले से फूंक दिया। सामाजिक न्याय की प्रतीक धरती, कर्पूरी ठाकुर के जन्मस्थान कर्पूरी ग्राम के समीप आयोजित इस भव्य रैली से प्रधानमंत्री ने आरजेडी और महागठबंधन पर करारा हमला बोला।रैली से पूर्व प्रधानमंत्री ने कर्पूरी ठाकुर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके परिवार से भेंट की। यह मुलाकात राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि एनडीए इस चुनाव में पिछड़ी जातियों और सामाजिक समीकरणों को केंद्र में रखकर रणनीति बना रहा है।
“हर हाथ में लाइट है, तो लालटेन की जरूरत क्या?
”रैली में जोश से लबरेज जनसमूह के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने एक नाटकीय अंदाज में कहा—सभी लोग अपने मोबाइल की टॉर्च जलाइए और हाथ ऊपर उठाइए।”जब लाखों की भीड़ ने रोशनी से मैदान जगमगा दिया, तब पीएम मुस्कुराते हुए बोले —जब हर एक के हाथ में लाइट है, तो लालटेन चाहिए क्या?
”उनका यह वाक्य सीधे आरजेडी के चुनाव चिह्न ‘लालटेन’ पर तंज था, जो रैली का सबसे चर्चित पल बन गया।
“2005 में बिहार जंगलराज से मुक्त हुआ था”प्रधानमंत्री मोदी ने कहा —अक्टूबर 2005 में बिहार जंगलराज से मुक्त हुआ था। नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनी। तब केंद्र में कांग्रेस-आरजेडी गठबंधन सत्ता में था, जिसने नीतीश कुमार के हर कदम में रोड़े अटकाए। कांग्रेस और आरजेडी, बिहार की जनता को परेशान करने में कोई कसर नहीं छोड़ते थे।
उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौर में आरजेडी, कांग्रेस को धमकी देती थी —> “अगर कांग्रेस नीतीश कुमार या एनडीए से किसी भी बात पर सहमत हो गई, तो वे समर्थन वापस ले लेंगे।
लालू राज पर तीखा हमला — “बर्बाद कर दिया बिहार की पीढ़ियों को”प्रधानमंत्री ने कहा —जहां आरजेडी जैसी पार्टी सत्ता में होती है, वहां कानून-व्यवस्था कायम नहीं रह सकती। उस दौर में हत्या, फिरौती, अपहरण और जबरन वसूली चरम पर थे। बिहार की पीढ़ियों को आरजेडी के जंगलराज ने बर्बाद कर दिया। इसका सबसे बड़ा खामियाजा मेरी माताओं-बहनों, युवाओं, दलितों और पिछड़े वर्गों को भुगतना पड़ा।”उन्होंने कहा कि उस समय थाने दलितों और अति पिछड़ों के लिए बंद थे, और नक्सलवाद-माओवादी आतंकवाद बिहार में पनप रहा था।
“माओवादी आतंक की कमर तोड़ी — यह मोदी की गारंटी है”प्रधानमंत्री मोदी ने कहा —2014 में आपने एनडीए को दिल्ली में मौका दिया। मैंने वादा किया था कि बिहार को माओवादी आतंक से मुक्त करूंगा। हमने उसकी कमर तोड़ दी है।
बहुत जल्द पूरा बिहार नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त होगा — यह मोदी की गारंटी है।”
महागठबंधन पर तंज — “लठबंधन मैदान में है”प्रधानमंत्री ने महागठबंधन को “लठबंधन” बताते हुए कहा —जो उम्मीदवार वे मैदान में उतार रहे हैं, वे पुराने दिनों को वापस लाने की चाहत रखते हैं। उनके प्रचार को सुनिए, जंगलराज की याद आ जाएगी। बिहार के लोगों को इस बार भी सजग रहना होगा और जंगलराज को हराना होगा।”
“फिर एक बार सुशासन सरकार” — नया नारा दिया पीएम मोदी ने जनसभा में प्रधानमंत्री ने जोश भरते हुए कहा —लोकतंत्र के महापर्व का बिगुल बज चुका है और पूरा बिहार कह रहा है —फिर एक बार एनडीए सरकार,फिर एक बार सुशासन सरकार,जंगलराज वालों को दूर रखेगा बिहार।”
आरक्षण और विकास पर बोले प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री ने कहा —हमने गरीबों, दलितों, महादलितों, पिछड़ों और अति पिछड़ों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। हमारी सरकार ने सामान्य वर्ग के गरीबों को 10% आरक्षण दिया और अनुसूचित जाति-जनजाति के आरक्षण को 10 साल के लिए बढ़ाया। कांग्रेस के समय में बिहार को जितना पैसा मिलता था, हमने उसका तीन गुना दिया है।”उन्होंने कहा कि अब समस्तीपुर से पूर्णिया तक सिक्स लेन हाईवे, नई रेललाइनें, वंदे भारत ट्रेनें और बिजली के नए कारखाने बन रहे हैं।
प्रशांत किशोर का पलटवार — “प्रधानमंत्री ने साफ क्यों नहीं कहा कि मुख्यमंत्री कौन होगा?”रैली के बाद जनसुराज प्रमुख प्रशांत किशोर ने सवालों की झड़ी लगा दी। उन्होंने कहा —प्रधानमंत्री जी ने अपने भाषण में केंद्र और राज्य की उपलब्धियां गिनाईं, लेकिन यह नहीं बताया कि अगर एनडीए जीतती है, तो क्या नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री रहेंगे और कितने दिनों तक?
”उन्होंने यह भी कहा कि —सम्राट चौधरी जिनके ऊपर नरसंहार के आरोप हैं, क्या प्रधानमंत्री उनके लिए वोट मांगेंगे? क्या बिहार के युवाओं को अब भी गुजरात और दूसरे राज्यों में पलायन करना होगा?
राजनीतिक विश्लेषकों की टिप्पणी — “प्रधानमंत्री को बिहार के लिए ठोस रोडमैप बताना चाहिए था”राजनीतिक विश्लेषकों ने कहा कि प्रधानमंत्री का यह दौरा भले ही भावनात्मक और रणनीतिक रहा हो, लेकिन बिहार के लिए अगले पांच वर्षों का ठोस मापदंड उन्होंने स्पष्ट नहीं किया।
एक वरिष्ठ शिक्षाविद ने कहा —प्रधानमंत्री बिहारियों को सिर्फ वोट बैंक समझकर हिंदू-मुस्लिम कार्ड खेलना चाहते हैं, लेकिन इस बार बिहार का प्रबुद्ध वर्ग बदलाव का मन बना चुका है।”
अब निगाहें 14 नवंबर पर — सत्ता की चाबी किसके हाथ?बिहार की सियासत अब निर्णायक मोड़ पर है। एनडीए की पूरी ताकत प्रधानमंत्री मोदी के करिश्मे पर टिकी है, जबकि महागठबंधन सामाजिक समीकरणों पर भरोसा जता रहा है।14 नवंबर को होने वाले मतदान में यह तय होगा कि बिहार ‘सुशासन’ की राह पर आगे बढ़ेगा या फिर ‘जंगलराज’ के अंधेरे में लौटेगा।
