बी के झा
NSK

कटिहार/पटना / नई दिल्ली, 26 अक्टूबर
बिहार में विधानसभा चुनावी सरगर्मी के बीच वक्फ संशोधन बिल को लेकर सियासी तापमान तेजी से बढ़ गया है। नेता प्रतिपक्ष और महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव ने शनिवार को कटिहार के प्राणपुर में एक चुनावी जनसभा के दौरान कहा कि अगर उनकी सरकार बनी, तो “वक्फ बिल को कुड़ेदान में फेंक देंगे।”तेजस्वी के इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में तूफान खड़ा कर दिया है। उनके बयान के तुरंत बाद बीजेपी और जेडीयू नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि तेजस्वी खुद को संसद से भी ऊपर समझने लगे हैं।
तेजस्वी का बयान और सीमांचल की सियासत प्राणपुर में चुनावी सभा को संबोधित करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा—वक्फ संशोधन बिल बीजेपी वालों ने बनाया और नीतीश कुमार ने समर्थन दिया। हमारी सरकार बनेगी तो उस बिल को कुड़ेदान में फेंक देंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तेजस्वी का यह बयान सीमांचल के मुस्लिम बहुल इलाकों में रणनीतिक तौर पर दिया गया है।
2020 के विधानसभा चुनाव में इसी क्षेत्र में ओवैसी की पार्टी AIMIM ने पांच सीटों पर जीत हासिल की थी, जिससे राजद को भारी नुकसान हुआ था। इस बार ओवैसी ने एक बार फिर सीमांचल में आक्रामक एंट्री ली है। तेजस्वी का यह रुख उनके वोट बैंक को एकजुट रखने का प्रयास माना जा रहा है।
तेजस्वी के एमएलसी का विवादित बयान तेजस्वी से पहले आरजेडी के एमएलसी कारी सोहैब ने भी एक सभा में वक्फ बिल को लेकर विवादित बयान दिया था।
उन्होंने कहा था कि—तेजस्वी यादव के मुख्यमंत्री बनते ही वक्फ बिल का समर्थन करने वालों का ऐसा इलाज करूंगा जिसे उनकी आने वाली नस्लें याद रखेंगी।”कारी सोहैब के इस बयान को लेकर पहले ही राजनीतिक हलकों में नाराजगी थी, अब तेजस्वी के ताजा बयान ने आग में घी डालने का काम किया है।
बीजेपी और जेडीयू का पलटवार
तेजस्वी के इस बयान पर बीजेपी सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा—वक्फ संशोधन बिल संसद से पास होकर कानून बन चुका है। इसमें बदलाव सिर्फ संसद ही कर सकती है। तेजस्वी जनता को गुमराह कर रहे हैं।”
वहीं, केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा—ना उनकी सरकार बनेगी, ना वे ऐसा कुछ कर पाएंगे।”जेडीयू प्रवक्ता अरविंद निषाद ने इसे चुनावी बयान बताते हुए कहा कि—तेजस्वी यादव अल्पसंख्यक वोटों को साधने के लिए ऐसी बयानबाज़ी कर रहे हैं। उनके माता-पिता के शासनकाल में भी मुसलमानों का इस्तेमाल केवल वोट बैंक की तरह हुआ था।
अब”महागठबंधन के सहयोगी दलों ने भी तेजस्वी के समर्थन में खुलकर सामने आए
वहीं विपक्ष का हमला महागठबंधन के भीतर कांग्रेस और वामदलों ने भी अब तेजस्वी यादव के इस विवादित बयान के समर्थन में खुलकर सामने मैदान में उतर गया है ।
हालांकि, एनडीए नेताओं का कहना है कि “महागठबंधन ने इस मुद्दे पर जानबूझकर ध्रुवीकरण की राजनीति छेड़ दी है।
”एक वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक ने कहा कि—तेजस्वी यादव का यह बयान सीमांचल में अल्पसंख्यक मतदाताओं को आकर्षित करने की कोशिश है, लेकिन इसने एनडीए को बैठे-बिठाए एक बड़ा चुनावी मुद्दा दे दिया है। इससे महागठबंधन को नुकसान हो सकता है।
”निष्कर्ष:
चुनावी रणनीति या राजनीतिक जोखिम?
वक्फ बिल पर दिए गए तेजस्वी यादव के बयान ने बिहार की सियासत में नई हलचल मचा दी है। जहाँ एक ओर राजद इसे “अल्पसंख्यक हितों की रक्षा” का मुद्दा बताकर चुनावी लाभ उठाने की कोशिश में है, वहीं एनडीए इसे “संविधान और संसद का अपमान” बता रही है। आगामी दिनों में यह मुद्दा सीमांचल से लेकर पटना तक सियासी बहस का केंद्र बनने वाला है—और यह तय है कि वक्फ बिल अब सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि राजनीतिक तापमान मापने का पैमाना बन चुका है।
