सारी फसाद की जड़ आरएसएस है, इसे बैन करो”: खरगे का तीखा वार — पीएम मोदी ने पटेल-नेहरू पर खोला पुराना पन्ना, कर्नाटक से उठी जंग अब दिल्ली तक — कांग्रेस बनाम आरएसएस की बहस फिर सुलगी

बी के झा

NSK

नई दिल्ली / बेंगलुरु, 31 अक्टूबर

कर्नाटक की सियासत से शुरू हुआ कांग्रेस बनाम आरएसएस विवाद अब राष्ट्रीय बहस का रूप ले चुका है।कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा —देश में कानून व्यवस्था की ज्यादातर समस्याओं की जड़ आरएसएस और बीजेपी हैं। मेरा निजी विचार है कि आरएसएस पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।”यह बयान ऐसे समय आया है जब कर्नाटक में उनके बेटे और मंत्री प्रियंक खरगे ने राज्य सरकार से मांग की थी कि सरकारी अधिकारी और कर्मचारी आरएसएस के आयोजनों में हिस्सा न लें।अब पार्टी अध्यक्ष का खुला समर्थन इस विवाद को और गहरा कर गया है।

खरगे का आरोप: “मोदी झूठ को सच में बदलने में माहिर, आरएसएस पर पटेल ने भी लगाई थी रोक”खरगे ने सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी को घेरते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करने में माहिर हैं। सरदार पटेल ने देश की धर्मनिरपेक्ष एकता की रक्षा के लिए आरएसएस को प्रतिबंधित किया था। गांधीजी की हत्या के बाद पटेल ने खुद श्यामा प्रसाद मुखर्जी को पत्र लिखकर कहा था कि आरएसएस की गतिविधियों ने ऐसा माहौल बनाया जिसने गांधी जी की हत्या को संभव किया।खरगे ने यह भी कहा कि कांग्रेस ही वह पार्टी है जिसने देश को जोड़ा, विभाजित नहीं किया।आज सरदार पटेल की जयंती है और इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि। एक लौहपुरुष थे, तो दूसरी आयरन लेडी। दोनों ने देश की एकता और अखंडता को मजबूत किया,”उन्होंने कहा।

मोदी का पलटवार:

“कश्मीर का पूरा एकीकरण पटेल चाहते थे, नेहरू ने नहीं होने दिया”दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के एकता नगर में आयोजित राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह में कांग्रेस और नेहरू पर पलटवार किया।मोदी ने कहा —सरदार पटेल अन्य रियासतों की तरह पूरे कश्मीर को भारत में मिलाना चाहते थे। लेकिन नेहरू जी ने ऐसा नहीं होने दिया। उसी गलती का खामियाजा देश ने दशकों तक भुगता है।”प्रधानमंत्री ने यह भी कहा किपटेल इतिहास लिखने में नहीं, इतिहास बनाने में विश्वास रखते थे। उन्होंने जो एकीकरण का सपना देखा था, वही आज भारत की ताकत है।”इस बयान के साथ ही मोदी ने पटेल की विरासत को एक बार फिर अपनी वैचारिक परंपरा से जोड़ा, जबकि कांग्रेस उसे अपने “संघर्ष और एकता के प्रतीक” के रूप में पेश कर रही है।

“नेहरू-सरदार में कोई मतभेद नहीं था” — खरगे का मोदी को जवाबखरगे ने मोदी के आरोपों को “झूठा आख्यान” बताते हुए कहा किभाजपा बार-बार नेहरू और पटेल के बीच मतभेद की बातें करती है, जबकि दोनों एक-दूसरे के प्रति गहरा सम्मान रखते थे। नेहरू ने ही गुजरात में पटेल की प्रतिमा का अनावरण किया था और सरदार सरोवर बांध की नींव रखी थी। कांग्रेस को देश तोड़ने नहीं, जोड़ने की विरासत मिली है।”उन्होंने कहा कि भाजपा “दही में कंकड़ ढूंढने” की कोशिश कर रही है ताकि जनता का ध्यान असली मुद्दों से हटाया जा सके।

राजनीतिक विश्लेषण: ‘

कांग्रेस की रणनीति बनाम बीजेपी की प्रतीक राजनीति’राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस के भीतर अब दो धाराएँ खुलकर दिख रही हैं —एक वह जो आरएसएस पर सख्त रुख चाहती है (जैसे प्रियंक और खरगे),और दूसरी जो कानूनी व्यावहारिकता की बात करती है (जैसे कार्ति चिदंबरम)।बीजेपी इस विवाद को अपने पक्ष में भुनाने की कोशिश कर रही है।

एक वरिष्ठ विश्लेषक ने कहा —

खरगे का यह बयान कांग्रेस के कोर वोटबैंक को भले सशक्त करे, पर यह भाजपा को ‘हिंदू अस्मिता’ की राजनीति को फिर से धार देने का मौका भी देता है। भाजपा इस बहस को ‘देशभक्ति बनाम विरोध’ के फ्रेम में पेश कर रही है, जो चुनावी परिदृश्य में उसे फायदा पहुंचा सकता है।

” निष्कर्ष:

सरदार पटेल की जयंती पर सियासी ‘सत्याग्रह’सरदार पटेल की 150वीं जयंती पर जहां प्रधानमंत्री मोदी ने “राष्ट्रीय एकता और कश्मीर के एकीकरण” का संदेश दिया,वहीं कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने “धर्मनिरपेक्षता और सांप्रदायिकता के खतरे” का मुद्दा उठाया।देश के दो प्रमुख दल एक ही नेता की विरासत से अपने-अपने अर्थ निकाल रहे हैं —एक “लौहपुरुष की नीतियों” से नई राष्ट्रकथा गढ़ना चाहता है, दूसरा “गांधी-नेहरू परंपरा” से आरएसएस की वैचारिक जड़ों पर प्रहार करना चाहता है।

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