बी के झा
NSK

बेगूसराय/पटना , 3 नवंबर
बिहार चुनावी समर में एक वीडियो ने पूरे राजनीतिक माहौल को हिला दिया है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के रविवार को बेगूसराय में मछली पकड़ने वाले वीडियो ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया। जहां एक ओर राहुल गांधी का यह रूप आम जनता को आत्मीय लगा, वहीं सत्ता पक्ष के नेताओं ने इसे “वोट के लिए दिखावा” बताया।
सबसे तीखी प्रतिक्रिया आई बेगूसराय सांसद और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह की ओर से, जिन्होंने राहुल गांधी की तुलना “लंगूर” से करते हुए उन्हें “जाली आदमी” करार दिया।गिरिराज सिंह का बयान —
“लंगूर की तरह कूद गए राहुल गांधी”मीडिया से बातचीत में गिरिराज सिंह ने कहा,वोट के लिए ये लोग कुछ भी कर सकते हैं। बेगूसराय में सर्कस जैसा दृश्य दिखाया। ये जाली आदमी हैं, लंगूर की तरह तालाब में कूद गए। जाल में पहले से मछली थी, उसे उठाकर गरीबों का मजाक उड़ाया। जिसके पैर ना फटे बेबाई, वो का जाने पीर पराई।”
उन्होंने आगे कहा कि यह सब वोट बटोरने की नौटंकी है। “गरीबों का दर्द समझना है तो उनके बीच रहो, तालाब में छलांग लगाकर नहीं।”मांझी का कटाक्ष — “
अब इनके पास यही काम बचा है”वहीं पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी ने भी राहुल गांधी पर हमला बोला। उन्होंने कहा,अब इनके पास यही काम बच गया है। कभी पीएम की मां को गाली दिलवाते हैं, कभी छठ पर्व को ड्रामा बताते हैं। विदेशों में देश की निंदा करते हैं। अब वोट के लिए मछली पकड़ना शुरू कर दिया। जनता इन्हें अच्छे से पहचानती है।
”वायरल वीडियो ने बढ़ाया राजनीतिक तापमान
रविवार को राहुल गांधी बेगूसराय में कांग्रेस प्रत्याशी अमिता भूषण के समर्थन में पहुंचे थे। सभा खत्म होने के बाद उन्होंने स्थानीय नेता मुकेश सहनी के साथ तालाब में छलांग लगाई और मछली पकड़ने का आनंद लिया। उनके साथ मौजूद लोगों ने तालियां बजाईं, जबकि सुरक्षा कर्मी असहज नज़र आए।वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया पर इसे “जनता के बीच उतरने वाले नेता” और “इलेक्शन स्टंट” —
दोनों नजरिए से देखा जाने लगा।वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी, जो मौके पर मौजूद थे, ने वीडियो साझा करते हुए लिखा —बहुत अच्छा लगा, राहुल जी जमीन से जुड़े नेता हैं।”कांग्रेस और महागठबंधन का पलटवार — “
गिरिराज सिंह ने पद की गरिमा गिराई”
गिरिराज सिंह की टिप्पणी के बाद कांग्रेस और महागठबंधन के नेताओं ने मोर्चा खोल दिया।कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व NSUI अध्यक्ष प्रेमचंद मिश्रा ने कहा,गिरिराज सिंह भले मोदी सरकार में मंत्री हों, लेकिन वो किस वजह से मंत्री बने हैं, ये पूरा देश जानता है। उन्हें मंत्री इसलिए बनाया गया ताकि वो ओछी और सांप्रदायिक भाषा से समाज को बांटते रहें। राहुल गांधी पर इस तरह की भाषा प्रयोग करके उन्होंने न सिर्फ कांग्रेस, बल्कि मंत्री पद की गरिमा का भी अपमान किया है।
वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी ने भी करारा तंज कसते हुए कहा —
गिरिराज सिंह बिना पेंदी का लोटा हैं, जो हर वक्त बयानबाजी में उलझे रहते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय —
“भाषा मर्यादा से नीचे”राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गिरिराज सिंह का यह बयान मर्यादाहीन और असंवेदनशील है।
राहुल गांधी भले विपक्ष में हैं, लेकिन वे देश के नेता प्रतिपक्ष हैं। किसी केंद्रीय मंत्री को उन्हें ‘लंगूर’ कहना न सिर्फ राजनीतिक असहिष्णुता दर्शाता है, बल्कि अपने पद की गरिमा को भी ठेस पहुंचाता है। सत्ता आती-जाती रहती है, लेकिन भाषा और आचरण की मर्यादा नेता की स्थायी पहचान होती है।
राहुल का “मछली वाला पल” — जनता से जुड़ाव या सियासी नौटंकी?राहुल गांधी का तालाब में उतरना और स्थानीय लोगों के साथ मछली पकड़ना, उनके समर्थकों के लिए “जनता से जुड़ाव का प्रतीक” है। वहीं बीजेपी इसे “इलेक्शन ड्रामा” बता रही है।इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि भारत की राजनीति में छवि निर्माण अब कितनी हद तक प्रदर्शन का खेल बन चुकी है?
