“मेरे छोटे नादान भाई…” — महुआ की धरती पर तेजस्वी और तेजप्रताप आमने-सामने, लालू परिवार में खुला ‘सियासी महाभारत’

बी के झा

NSK

महुआ / पटना / न ई दिल्ली, 3 नवंबर

बिहार विधानसभा चुनाव के बीच अब सियासी जंग सिर्फ दलों और गठबंधनों तक सीमित नहीं रही —

यह अब परिवारों के भीतर भी धधक उठी है।

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के दो ‘युवराज’ — तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव —

इस बार एक-दूसरे के खिलाफ चुनावी मोर्चे पर उतर आए हैं।रविवार को जब तेजस्वी यादव ने महुआ विधानसभा क्षेत्र में अपने बड़े भाई के खिलाफ प्रचार किया, तो लालू परिवार की यह अंतर्विरोधी कहानी खुले मैदान में आ गई।तेजप्रताप ने इस पर जो प्रतिक्रिया दी, उसने न केवल सियासी गलियारों में हलचल मचा दी बल्कि यह भी साफ कर दिया कि “लालू यादव की विरासत” अब दो राहों में बंट चुकी है।

तेजप्रताप का वार: “हमारे छोटे और नादान भाई को बताना चाहता हूँ…”तेजप्रताप यादव ने अपने एक्स (पूर्व ट्विटर) अकाउंट पर लिखा —हमारे छोटे और नादान भाई तेजस्वी ने जो महुआ में कहा कि पार्टी से बड़ा कोई नहीं होता,लेकिन हम अपने छोटे भाई को कहना चाहते हैं कि पार्टी से बड़ी हमारी जनता होती है।लोकतंत्र में सबसे बड़ी केवल जनता होती है, कोई पार्टी या परिवार नहीं।

महुआ मेरी कर्मभूमि है —

मेरे लिए पार्टी और परिवार से बढ़कर।

तेजप्रताप ने आगे लिखा —महुआ की जनता जनार्दन मुझे भारी मतों से जिता कर सदन भेजेगी और हम मिलकर महुआ को विकास की राह पर आगे बढ़ाएँगे। विजयी महुआ, विकसित महुआ!!उनके इस बयान को राजनीतिक हलकों में “संतुलित मगर तीखा” जवाब माना जा रहा है — एक ऐसा जवाब जो रिश्तों की लकीरों को भी पार कर गया है।

महुआ की सभा में तेजस्वी का इशारों में वारइधर, रविवार दोपहर तेजस्वी यादव हेलीकॉप्टर से महुआ के गांधी मैदान पहुँचे।

हज़ारों की भीड़ उमड़ी थी। मंच पर आते ही तेजस्वी ने बिना अपने भाई का नाम लिए कहा —व्यक्ति चाहे कोई भी हो, पार्टी से बढ़कर नहीं होता।पार्टी हमारे कार्यकर्ताओं की माई-बाप होती है।तेजस्वी ने यह भी कहा कि महुआ से डॉ. मुकेश कुमार रौशन को लालू यादव ने टिकट दिया है और जनता को उन्हें भारी मतों से जिताने की अपील की।

उन्होंने मंच से युवाओं से कहा —नौकरी की तैयारी कीजिए, आपकी सरकार आने वाली है — बस आप राजद प्रत्याशी को जिताइए।”उनकी बातों में दृढ़ता थी, मगर शब्दों में छिपी ‘पारिवारिक दूरी’ हर किसी को महसूस हुई।

महुआ

लालू परिवार की ‘राजनीतिक प्रयोगशाला’ अब रणभूमि बनीमहुआ, जो कभी लालू परिवार के ‘सियासी संस्कार’ की भूमि थी, अब संघर्ष का मैदान बन चुका है।याद रहे, 2015 में तेजप्रताप यादव यहीं से विधायक चुने गए थे, और यहीं से उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत हुई थी।आज वही महुआ दो भाइयों के बीच सत्ता और सिद्धांत की जंग का प्रतीक बन गया है।

राजनीतिक विश्लेषण: “

तेजप्रताप का बयान सिर्फ नाराज़गी नहीं, संदेश भी है”राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि तेजप्रताप का बयान केवल एक भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि एक संदेश है —

एक ऐसा संदेश जो महागठबंधन के भीतर ‘दरार’ का संकेत दे रहा है।

एक स्थानीय विश्लेषक ने कहा —लालू यादव और परिवार ने तेजप्रताप को लंबे समय से ‘किनारे’ कर रखा था।अब उन्होंने जो कहा है, उसमें भीतर से चोट भी है और आत्मविश्वास भी।

उन्होंने जोड़ा —तेजप्रताप ने सीधे शब्दों में कुछ नहीं कहा, मगर उनके ‘जनता मालिक है’ वाले वाक्य ने तेजस्वी के ‘पार्टी सर्वोपरि’ के सिद्धांत को चुनौती दे दी है।”

क्या 2025 में ‘लालू परिवार की जंग’ वोटों को प्रभावित करेगी?अब बड़ा सवाल यह है कि इस भाई-भाई की जंग का असर बिहार के चुनावी गणित पर कितना पड़ेगा?क्या महुआ में तेजस्वी का प्रचार लालू परिवार की एकता पर भारी पड़ेगा,या जनता तेजप्रताप की “जनता सर्वोपरि” की भावना से प्रभावित होगी?14 नवंबर को जब नतीजे आएँगे, तो यह साफ हो जाएगा कि बिहार की जनता ने ‘पार्टी’ को चुना या ‘परिवार’ को’।

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