LPG पर बढ़ती चिंता: सिलेंडर की सप्लाई सुस्त, कीमतें तेज… क्या अभी और महंगी होगी रसोई गैस?

बी के झा

NSK

नई दिल्ली, 18 मई

देशभर में रसोई गैस यानी एलपीजी (Indian Oil Corporation सहित अन्य ऑयल मार्केटिंग कंपनियों) को लेकर आम उपभोक्ताओं की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। एक समय था जब गैस सिलेंडर की बुकिंग के कुछ ही दिनों में डिलीवरी हो जाती थी, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। बुकिंग के बाद कई जगहों पर उपभोक्ताओं को 25 से 45 दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है। दूसरी ओर, कीमतों में लगातार बढ़ोतरी ने घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है।

सबसे बड़ी चिंता यह है कि क्या एलपीजी की यह स्थिति आने वाले दिनों में सुधरेगी या आम लोगों को लंबे समय तक महंगी गैस और धीमी सप्लाई की मार झेलनी पड़ेगी?

DAC कोड और बढ़ी डिलीवरी की मुश्किलेंगैस वितरण व्यवस्था में 100 प्रतिशत DAC (Delivery Authentication Code) लागू होने के बाद पारदर्शिता तो बढ़ी है, लेकिन कई उपभोक्ताओं के लिए नई परेशानियां भी खड़ी हो गई हैं। खासकर वे लोग, जिनके पास वैध गैस कनेक्शन किसी दूसरे शहर में है या जो कोरोना काल में शहर छोड़कर गांव लौट आए, उन्हें सिलेंडर हासिल करने में अधिक कठिनाई हो रही है।

हालांकि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों का दावा है कि देश में एलपीजी की कोई कमी नहीं है और उनके पास लगभग 45 दिनों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और कहानी बयां कर रही है।

कमजोर तबके पर सबसे ज्यादा असर

रिपोर्टों के अनुसार, गैस की बढ़ती कीमतों और सप्लाई में देरी का सबसे ज्यादा असर छोटे दुकानदारों, ठेले-खोमचे वालों और दिहाड़ी मजदूरों पर पड़ा है। कई छोटे भोजन विक्रेताओं को अपनी दुकानें बंद करनी पड़ी हैं, जिससे सस्ता भोजन उपलब्ध होना भी कठिन होता जा रहा है।आर्थिक रूप से कमजोर परिवार अब गैस बचाने के लिए खाना कम पकाने या वैकल्पिक ईंधन की ओर लौटने को मजबूर हो रहे हैं।

क्यों बढ़ रही है परेशानी?

विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा वैश्विक परिस्थितियां एलपीजी बाजार को प्रभावित कर रही हैं। पश्चिम एशिया में तनाव और खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से गैस आपूर्ति पर दबाव बना हुआ है।भारत अपनी बड़ी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस महंगी होने का सीधा असर घरेलू कीमतों और सप्लाई पर पड़ता है।विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक होर्मुज मार्ग से आपूर्ति सामान्य नहीं होती, तब तक एलपीजी की कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं और डिलीवरी में देरी भी जारी रह सकती है।

देश के प्रमुख शहरों में घरेलू एलपीजी के ताजा दाम (14.2 किलोग्राम)दिल्ली: ₹913जयपुर: ₹916.50बेंगलुरु: ₹915.50देहरादून: ₹932हैदराबाद: ₹965इंदौर: ₹941रायपुर: ₹984.50पटना: ₹1002.50अंडमान: ₹989पटना समेत कई शहरों में घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत 1000 रुपये के आसपास पहुंच चुकी है, जो मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों के लिए बड़ी चिंता का विषय बन गई है।

कमर्शियल सिलेंडर ने कारोबारियों की बढ़ाई मुश्किल

19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में भी भारी बढ़ोतरी हुई है, जिससे होटल, ढाबा और छोटे व्यापारियों की लागत बढ़ गई है।प्रमुख शहरों में कमर्शियल एलपीजी के दाम इस प्रकार हैं—दिल्ली: ₹3071.50मुंबई: ₹3024कोलकाता: ₹3202चेन्नई: ₹3237बेंगलुरु: ₹3152अहमदाबाद: ₹3091पुणे: ₹3084लखनऊ: ₹3194पटना: ₹3346.50

आगे क्या?

राहत या और दबाव?

ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय हालात जल्दी नहीं सुधरे, तो आने वाले महीनों में एलपीजी और महंगी हो सकती है। सरकार पर सब्सिडी बढ़ाने और सप्लाई सिस्टम को अधिक लचीला बनाने का दबाव भी बढ़ सकता है।

आम जनता अब यही पूछ रही है—

क्या रसोई गैस फिर पहले जैसी आसानी से मिलेगी? क्या कीमतों में राहत मिलेगी?

फिलहाल संकेत यही हैं कि एलपीजी उपभोक्ताओं को कुछ समय तक महंगी कीमतों और लंबी प्रतीक्षा दोनों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में देश की रसोई पर महंगाई की यह आग अभी बुझती नजर नहीं आ रही।

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