महाराष्ट्र में सत्ता-संघर्ष की आंच अब बिहार तक, शिंदे–भाजपा विवाद से एनडीए के भीतर हलचल, नीतीश में बेचैनी बढ़ी

बी के झा

NSK

नई दिल्ली/मुंबई/पटना, 27 नवंबर

महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर तीखी उठापटक की गिरफ्त में है। महायुति सरकार के दो प्रमुख घटक—भारतीय जनता पार्टी और एकनाथ शिंदे की शिवसेना—के बीच पिछले कुछ महीनों से simmering tension अब खुले आरोप-प्रत्यारोप के रूप में फूट पड़ा है।नवीनतम स्टिंग ऑपरेशन विवाद ने तो जैसे इस खाई को और चौड़ा कर दिया है।लेकिन इस तूफ़ान की गूँज केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं रही—इसका असर अब बिहार की सत्ता-समीकरण तक पहुँचता दिख रहा है।एनडीए की मजबूती का ढोल पीटने वाले सहयोगी दल अब अंदरखाने पूरी सतर्कता मोड में आ गए हैं, खासकर नीतीश कुमार।

महाराष्ट्र में नया बम: “स्टिंग ऑपरेशन” और दो भाइयों का टकरावशिवसेना (शिंदे गुट) के विधायक नीलेश राणे ने मालवण में भाजपा कार्यकर्ता के घर “नकद भरे बैग” मिलने का दावा किया—और वह भी एक स्टिंग ऑपरेशन के जरिये।निकाय चुनाव से पहले इस आरोप ने माहौल गर्मा दिया।लेकिन विवाद यहीं तक नहीं रुका।भाजपा कोटे के मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने राणे के इस “घर में घुसने वाले स्टिंग” पर कड़ी आपत्ति जताई और कहा:किसी के शयनकक्ष में कैमरा लेकर घुसना स्टिंग नहीं, मर्यादा भंग है।”अब दिलचस्प मोड़—अपने ही भाई नितेश राणे ने नीलेश राणे पर पलटवार करते हुए भाजपा का बचाव कर दिया:राजनीतिक कार्यकर्ताओं के पास वैध व्यापारिक कमाई होती है, घर में कैश होना अपराध नहीं।”दो भाई—दो राजनीतिक छतें—और दो विपरीत दावे।महाराष्ट्र की राजनीति में इससे बड़ा प्रतीक और क्या हो सकता है?

भाजपा–शिंदे सेना रिश्तों में गहराता अविश्वासमहाराष्ट्र की महायुति सरकार वैसे ही “तीन-धुरी” दबाव में है—शिंदे गुटफडणवीस की भाजपाऔर अजीत पवार का एनसीपी गुटस्टिंग विवाद ने भाजपा–शिंदे धुरी में पहले से मौजूद तिरछे समीकरण को और अस्थिर कर दिया है।राजनीतिक गलियारों में यह प्रश्न और ज़ोर पकड़ रहा है—क्या महाराष्ट्र की सरकार 2025 के चुनाव तक स्थिर रह पाएगी?”

दिलचस्प लेकिन अहम—महाराष्ट्र की कलह पहुँची पटनाराजनीति केवल स्थानीय नहीं होती।महाराष्ट्र में हो रही ये तनातनी बिहार की सत्ता-समीकरण तक अपना कंपन भेज चुकी है।

नीतीश कुमार सतर्क मोड मेंसूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार महाराष्ट्र के घटनाक्रम को बेहद करीब से देख रहे हैं।ऊपर से एनडीए का चेहरा मुस्कुराता दिखे,लेकिन भीतर यह आशंका तैर रही है—कहीं अगला नंबर जेडीयू के विधायकों का तो नहीं?”बिहार में भाजपा को इस बार अभूतपूर्व बढ़त मिली है,और राजनीति के अनुभवी खिलाड़ी नीतीश जानते हैं किसत्ता समीकरण जितना मजबूत दिखता है, उतना होता नहीं।

अंदरखाने” RJD से बैक-चैनल संपर्क?पिछले 48 घंटों में कई विश्वसनीय स्रोतों का दावा है कि—नीतीश कुमार ने कुछ RJD नेताओं से चुपचाप संवाद बढ़ायापुराने भरोसेमंद चैनल फिर सक्रिय हुएसंदेश साफ:“राजनीति में कोई दरवाज़ा स्थायी तौर पर बंद नहीं होता।”

सम्राट चौधरी का दिल्ली दौरा—संयोग या संकेत?बिहार के गृह मंत्री और भाजपा नेता सम्राट चौधरी का दो दिनों मेंजे.पी. नड्डाऔर अमित शाहसे मुलाकात ने भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।स्थानीय राजनीतिक विश्लेषक का कहना है:महाराष्ट्र की टूट–फूट से भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व चिंतित है।बिहार में ऐसी कोई गुंजाइश न बने—इसलिए यह साइलेंट कोऑर्डिनेशन चल रहा है।

क्या बिहार में ‘अगली पलटी’ का खतरा मंडरा रहा है?यह सवाल हवा में है, ज़मीन पर नहीं—लेकिन नीतीश कुमार की राजनीतिक यात्रा यह साबित करती है कि— वह वहां कदम रखते हैं, जहां उन्हें राजनीतिक सुरक्षा मिले।अगर महाराष्ट्र की तकरार गहरी होती हैऔर एनडीए की राष्ट्रीय छवि को चोट पहुँचती है,तो बिहार का समीकरण भी डगमगा सकता है।कुछ वरिष्ठ पत्रकारों का कहना है—जैसे ही नीतीश को लगता है कि भाजपा उनके फायदे के लिए नहीं,अपने विस्तार के लिए काम कर रही है—वह अगला कदम उठा सकते हैं।”

निष्कर्ष:

महाराष्ट्र का विवाद केवल महाराष्ट्र का नहींस्टिंग ऑपरेशन, दो भाइयों की रार,भाजपा–शिंदे सेना के बीच खिंचाव,फडणवीस–शिंदे का शक्ति-संतुलन, और बिहार में नीतीश की बढ़ती सतर्कता…ये सब मिलकर संकेत दे रहे हैं कि— महाराष्ट्र अब केवल एक राज्य नहीं,बल्कि राष्ट्रीय राजनीति का बैरोमीटर बन चुका है।

महाराष्ट्र अगर कांपेगा—तो बिहार, झारखंड, आंध्र, असम…हर जगह राजनीतिक कंपन महसूस होगा।अगले कुछ हफ्तों में महाराष्ट्र और बिहार—दोनों राज्यों मेंबड़ी राजनीतिक चालें देखने को मिल सकती हैं।

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