आनंद मोहन का दूसरा वारिस मैदान में? नबीनगर से अंशुमान आनंद को BJP टिकट मिलने की अटकलें तेज

बी के झा

NSK

पटना / नई दिल्ली, 10 अक्टूबर

बिहार की सियासत एक बार फिर बाहुबली नेता आनंद मोहन के परिवार के इर्द-गिर्द घूमती नजर आ रही है। चर्चाएं तेज हैं कि आनंद मोहन के छोटे बेटे अंशुमान आनंद को भारतीय जनता पार्टी (BJP) नबीनगर विधानसभा सीट से टिकट दे सकती है। अगर ऐसा हुआ, तो यह आनंद परिवार के तीसरे सदस्य का चुनावी डेब्यू होगा।सियासी विरासत की नई कड़ीआनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद और बड़े बेटे चेतन आनंद पहले ही राजनीति में सक्रिय हैं। लवली आनंद इस समय जनता दल (यूनाइटेड) से शिवहर लोकसभा सीट की सांसद हैं, जबकि चेतन आनंद शिवहर विधानसभा से विधायक हैं।अब अगर अंशुमान भी नबीनगर से चुनावी मैदान में उतरते हैं, तो आनंद परिवार का तीसरा राजनीतिक चेहरा उभरकर सामने आएगा।सूत्रों के मुताबिक, अंशुमान आनंद को नबीनगर से BJP टिकट मिलने की संभावना इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि यह सीट लवली आनंद की सियासी जन्मस्थली रही है। 1996 में लवली यहीं से विधायक बनी थीं और इससे पहले 1994 में वैशाली लोकसभा उपचुनाव जीतकर देश की सबसे युवा सांसदों में शामिल हुई थीं।बिहार की सवर्ण राजनीति में ‘आनंद परिवार’ की मजबूत पकड़बिहार में सवर्णों की राजनीति की चर्चा जब भी होती है, आनंद मोहन का नाम स्वाभाविक रूप से सामने आता है। 90 के दशक में वे राजपूत समाज के अगुवा नेताओं में गिने जाते थे।उन्होंने 1990 में सहरसा जिले की महिषी सीट से अपना पहला विधानसभा चुनाव जीता था। इसके बाद 1996 और 1998 में वे शिवहर लोकसभा सीट से सांसद बने।लेकिन 1994 में डीएम जी. कृष्णैया हत्याकांड ने उनकी राजनीतिक यात्रा को झटका दिया। इस मामले में सजा के चलते उन्हें कई वर्षों तक जेल में रहना पड़ा। हालांकि, 2023 में नीतीश सरकार द्वारा जेल नियमों में किए गए बदलाव के बाद उनकी रिहाई का रास्ता साफ हुआ।रिहाई के बाद आनंद मोहन ने लगातार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और NDA के प्रति समर्थन जताया।यही कारण है कि अब उनके परिवार के BJP-जेडीयू गठबंधन में और मजबूत होने की संभावना बढ़ गई है।बदलते समीकरणों के बीच नया दांवनीतीश कुमार के NDA में लौटने के बाद से आनंद परिवार ने राजद से दूरी बना ली। चेतन आनंद ने भी फ्लोर टेस्ट में तेजस्वी यादव का साथ छोड़ जेडीयू के पक्ष में वोट किया था।अब अगर BJP अंशुमान आनंद को टिकट देती है, तो यह समझा जाएगा कि एनडीए आनंद मोहन के प्रभाव वाले इलाकों में सवर्ण वोट बैंक को और पुख्ता करना चाहता है।‘राजपूत नेतृत्व’ की तलाश में BJP को नया चेहराराजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में BJP को अब भी एक प्रभावशाली राजपूत चेहरा तलाशने की जरूरत है।ऐसे में अंशुमान आनंद, जिनकी छवि युवा, पढ़े-लिखे और राजनीतिक परिवार से आने वाले चेहरे की है, पार्टी के लिए एक संतुलित उम्मीदवार साबित हो सकते हैं।पारिवारिक समीकरण और भविष्य की रणनीतिआनंद मोहन के परिवार में लवली आनंद, चेतन आनंद और अब संभवतः अंशुमान—तीनों ही सक्रिय राजनीति में होंगे।विशेषज्ञों का मानना है कि यह परिवार अब “एक दल एक मंच” की रणनीति पर काम कर रहा है।जहां लवली आनंद संसद में NDA की आवाज़ बनेंगी, चेतन बिहार विधानसभा में और अंशुमान चुनावी मैदान में नए उत्साह के साथ उतरेंगे।राजनीतिक हलकों में यह कहा जा रहा है कि अगर नबीनगर से अंशुमान को टिकट मिलता है, तो 2025 का बिहार विधानसभा चुनाव आनंद मोहन परिवार के लिए सियासी ‘लिटमस टेस्ट’ साबित होगा।

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